कोरबा। जिले में नाबालिगों के द्वारा आत्महत्या की घटना एकाएक बढ़ गई है। एक बार फिर अलग अलग क्षेत्र में रहने वाले किशोरी व युवक की जहरसेवन से मौत हो गई। उन्हें इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल दाखिल कराया गया था, जहां लगातार प्रयास के बाद भी डॉक्टर उनकी जान नही बचा सके। मामले में अस्पताल पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई पूरी की है। पहली घटना उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम जुनवानी के बहेराभांठा में जगदीश प्रसाद वैष्णव निवास करता है। वह रोजी मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते आ रहा था। उसकी इकलौती बेटी चित्रलेखा वैष्णव 17 वर्ष ने कक्षा ग्यारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। वह भैसमा के तहसील कार्यालय स्थित लोक सेवा केंद्र में बतौर कम्प्यूटर ऑपरेटर काम करती थी। चित्रलेखा करीब एक माह से काम पर नही जा रही थी। वह घर में रहकर काम में मां का हाथ बंटा रही थी। वह 16 फरवरी की सुबह बस्ती की ओर गई थी, जहां से लौटने के बाद अपने कमरे में जाकर सो गई। इस दौरान जगदीश खाना खा रहा था। उसे अचानक कीटनाशक के दुर्गंध का आभास हुआ। उसने बेटी के कमरे में जाकर देखा तो वह उल्टी कर रही थी। उसकी जहरसेवन के कारण हालत बिगड़ चुकी थी। परिजनों ने किशोरी को आनन फानन इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले आया, जहां करीब सप्ताह भर चले इलाज के बाद किशोरी की मौत हो गई। इसी तरह दूसरी घटना रजगामार पुलिस चौकी क्षेत्र की है। रजगामार बस्ती में जगलाल कंवर निवास करता है। उसने अपने 20 वर्षीय पुत्र मनोरथ कंवर का रिश्ता कहीं तय कर दिया था। वह निर्धारित उम्र में बेटे का विवाह करने तैयारी में जुटा था। इससे पहले ही मनोरथ ने किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल दाखिल कराया गया था, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। अस्पताल पुलिस ने दोनों ही मामले में मेमो के आधार पर वैधानिक कार्रवाई पूरी की। तत्पश्चात पोस्टमार्टम उपरांत मृतकों के शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। जुनवानी के बहेराभांटा में रहने वाली चित्रलेखा वैष्णव की जहरसेवन से मौत को लेकर परिजन पशोपेश में फंस गए हैं। दरअसल परिवार रोजी मजदूरी कर जीविकोपार्जन करता है। परिजनों का कहना है कि उनके घर में कीटनाशक तो दूर किसी भी प्रकार का जहरीला पदार्थ नही था। गांव में ही ऐसे किसी भी पदार्थ की बिक्री नही की जाती। ऐसे में चित्रलेखा को कीटनाशक कहां से मिला। उनके लिए भी समझ से परे है।
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