टायर ब्लास्ट में घायल मजदूर का एक पैर कटा, डॉक्टर बोले: जान बचाने दूसरा पैर भी पड़ सकता है काटना, आईओसीएल की लापरवाही पर भड़के परिजन
कोरबा। दीपका खदान क्षेत्र में बुधवार दोपहर बारूद गाड़ी के टायर ब्लास्ट से एक ऐसा धमाका हुआ जिसने मजदूर की जिंदगी को झकझोर दिया। भीषण हादसे में आईओसीएल की बारूद गाड़ी में काम करने वाला कर्मचारी कृष्णा बरेकर उर्फ कान्हा 30 वर्ष, निवासी विकास नगर कुसमुंडा गंभीर रूप से घायल हो गया। कान्हा के दाहिना पैर बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसे काटना पड़ा, जबकि डॉक्टरों के अनुसार जान बचाने के लिए उसका दूसरा पैर भी काटना पड़ सकता है। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि बारूद गाड़ी के टायर फटने से यह धमाका हुआ, जबकि कुछ का दावा है कि बारूद के असुरक्षित हैंडलिंग के कारण यह विस्फोट हुआ। हादसे के बाद कान्हा को पहले गेवरा अस्पताल और फिर न्यू कोरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत को बेहद नाजुक बताया है।
स्थानीय कर्मचारियों और यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि यह हादसा ठेका कंपनी आईओसीएल की लापरवाही का नतीजा है। बारूद जैसी अत्यंत संवेदनशील सामग्री के परिवहन और उपयोग में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते यह बड़ा हादसा हुआ। सूत्र बताते हैं कि मजदूरों को अक्सर सुरक्षा उपकरण दिए बिना काम पर लगाया जाता है और ब्लास्टिंग प्रक्रिया के दौरान पर्यवेक्षण भी न के बराबर रहता है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि अगर यह घटना एसईसीएल के खदान क्षेत्र में हुई है, तो एसईसीएल प्रबंधन इस हादसे से कैसे अलग हो सकता है? लोगों का कहना है कि ठेका कंपनी की निगरानी और अनुमति देने की जिम्मेदारी एसईसीएल की होती है, ऐसे में निगरानी में कमी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।एसईसीएल के उच्च प्रबंधन से लेकर सुरक्षा विभाग तक पर जांच की आंच पहुंचने की उम्मीद है।
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परिजनों में आक्रोश, न्याय की मांग
कान्हा परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य है। हादसे के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों ने कहा कि एसईसीएल और आईओसीएल दोनों को मिलकर इसका जवाब देना होगा ।मजदूरों की जिंदगी कोई प्रयोगशाला नहीं है। वही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। दीपका खदान में हुए इस हादसे ने सिस्टम की लापरवाही और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने की जिंदा तस्वीर को उजागर किया है अब सवाल यह है कि क्या हर हादसे के बाद जांच और मुआवजे के नाम पर फाइलें बंद होती रहेंगी, या इस बार जिम्मेदारों पर वास्तव में कार्रवाई होगी?
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