कोरबा। मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट यूनिट के लिए लाइसेंस मिलने के बाद अब 7 साल पहले मिली मशीन में शामिल डीप फ्रीजर में खराबी आ गई, जिससे संचालन अटक गया है। प्रबंधन सुधार कराने जुटा हुआ है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को ब्लड के अलावा अन्य कंपोनेंट प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी व डब्ल्यूबीसी की आवश्यकता को देखते हुए 7 साल पहले वर्ष 2019 में सीजीएमएससी द्वारा जिला अस्पतालों को ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन उपलब्ध कराई गई थी। जिला अस्पताल कोरबा को भी मशीन प्रदान की गई थी, लेकिन पूरक मशीन की सप्लाई में गलती होने की वजह से ब्लड कंपोनेंट यूनिट शुरू नहीं हो पाया। सुविधा को शुरू करने पूरक मशीन के रूप में नई रेफ्रीजरेटर सेंट्रीफ्यूज की जरूरत थी, जिसकी सप्लाई की ही नहीं गई। वर्ष 2022 में जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज संबद्ध होने के बाद मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ ही ब्लड कंपोनेंट की आवश्यकता भी बढ़ गई। लंबे इंतजार के बाद 6 साल बाद जिला प्रशासन ने डीएमएफ से ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन के लिए 40 लाख से रेफ्रीजरेटर सेंट्रीफ्यूज खरीदी की। इसके बाद ब्लड कंपोनेंट यूनिट शुरू करने तैयारी करने के साथ ही लाइसेंस के लिए प्रयास शुरू किया। लंबे इंतजार के बाद लाइसेंस मिला, लेकिन इसके बाद भी यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका।
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