दीपावली के बाद धान कटाई ने पकड़ा जोर, अर्ली वैरायटी की धान पककर हो चुकी है तैयार
कोरबा। जिले में दीपावली के बाद अब धान कटाई का काम जोर पकडऩे लगा है। धान के साथ अब हाइब्रिड एचएमटी धान देर से पकाने वाली धान की कटाई भी शुरू हो गई है। किसान सुबह से शाम तक खेतों में नजर आने लगे हैं। जिले के गांव में अधिकांश किसान देर से पकने वाले धान स्वर्णा धान की बोवाई करते हैं। वहीं कुछ गांव में जहां सिंचाई के बांध नहर पहुंचती है व स्वयं के सिंचाई का साधन है इसे किसान समय से पहले ही धान की बुवाई पूरी कर लेते हैं। इन फसलों की कटाई अब शुरू हो गईं है। वही देर से पकने वाले धान की कटाई भी कुछ गावों में शुरु हो गई है। धान कटाई का काम जोर पकडऩे लगा है। धान कटाई के बाद किसान ट्रैक्टर या अन्य साधन से फसल को खलिहान तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं। किसानों ने बताया कि पौधों के अधिक सूखने से कटाई में देरी होती है। धान के पक कर तैयार होने के बाद कटाई करना उपयुक्त है। अब लेट वेरायटी की धान कटाई भी शुरू कर रहे है। कुछ क्षेत्र में अभी लेट है। सप्ताह भर के बाद फसल कटाई में किसान व्यस्त हो जाएंगे।
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मजदूरी दर बढऩे से किसान परेशान
कटाई करने वाले मजदूर के द्वारा प्रत्येक वर्ष मजदूरी बढ़ाई जाने से किसान परेशान हैं। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि 200-250 सौ रुपए मजदूरी चलने के बाद भी समय पर मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूर शुरुआत से अपनी फसल की कटाई कर लेते हैं। इसके बाद ही दूसरों के खेतों में मजदूरी करने जाते हैं। वही आने वाले समय में मजदूरी और इजाफा होने की संभावना है।
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अवारा मवेशियों ने भी बढ़ाई परेशानी
जिले में कई जगह अभी देरी है। वहां फसल को बचाने में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बार सरकार द्वारा फसल को बचाने के लिए किसी प्रकार का कोई अभियान नहीं चलाया गया है। ऐसे में मवेशी खुले में फसल को बर्बाद कर रहे है।
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दूसरे प्रांत से पहुंचने लगे हार्वेस्टर
धान कटाई के लिए कंबाइन हार्वेस्टर पंजाब हरियाणा से पहुंच रहे हैं। इसमें घंटों का काम मिनटों में हो रहा है तो वहीं मजदूरों की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ रही। किसान सीधे धान को खेत से खलिहान ले जाने के बजाय खरीदी केंद्र में ले जाते हैं। जिले के कई क्षेत्र में कुछ किसानों ने हार्वेस्टर खरीद लिया है। इसका प्रयोग स्वयं की खेती के अलावा दूसरों के खेतों में धान कटाई वह मिजाई करते हैं। हालांकि हार्वेस्टर से धान कटाई करने पर पैरा खेत में ही रह जाता है। इससे किसानों को मवेशियों को खिलाने के लिए चारा नहीं मिल पाता। लेकिन इससे समय व पैसों की बचत होती है। दोनों थ्रेसर का प्रयोग कटाई एवं मिंजाई के लिए बढ़ गया है।
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