Sunday, January 25, 2026

धान खरीदी की रफ्तार धीमी, लक्ष्य से पिछड़ता नजर आ रहा जिला, 24 खरीदी कार्य दिवस में रोजाना 93 हजार 395 क्विंटल धान खरीदी की चुनौती

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कोरबा। किसानों का एक -एक दाना वाजिब दाम पर धान खरीदने का वादा कर सत्ता में आई साय सरकार के इस साल की धान खरीदी व्यवस्थाओं ने समितियों से लेकर किसानों की मुसीबतें बढ़ा दी है। समिति स्तर पर प्रतिदिन धान खरीदी की लिमिट गत वर्ष की तुलना आधे से भी कम किए जाने की वजह से सीमांत एवं दीर्घ कृषकों का ऑफलाइन टोकन अपेक्षाकृत नहीं कट पा रहा है।जिसकी वजह से आकांक्षी जिला कोरबा पहली बार धान खरीदी के लक्ष्य से अभी से पिछड़ता नजर आ रहा है। 31 लाख 19 हजार क्विंटल के तय लक्ष्य की पूर्ति में महज 8 लाख 78 हजार 145 क्विंटल धान खरीदी की वजह से लक्ष्य प्राप्ति के लिए शेष बचे 24 खरीदी कार्य दिवस में जिले के 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों को प्रतिदिन 93 हजार 395 क्विंटल धान खरीदी करनी पड़ेगी। आधा दर्जन से अधिक उपार्जन केंद्रों में लिमिट कम होने से किसान परेशान है। कई उपार्जन केंद्रों में टोकन नहीं कटने से परेशान किसानों ने न केवल शासन की नियत पर सवाल उठाए वरन लिमिट बढ़ाए जाने की बात कही,15 नवंबर से 31 जनवरी 2026 तक खरीफ विपणन वर्ष 2025 -26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है। आकांक्षी जिला कोरबा के किसानों में जहां सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ साथ 800 रुपए प्रति क्विंटल की राशि बोनस के तौर पर देकर 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान लेने के वादों पर खरा उतरने से उत्साह है, वहीं इस साल एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन से लेकर डिजिटल क्रॉप सर्वे त्रुटिपूर्ण गिरदावरी तकनीकी पेंच बिक्री रकबा में कटौती ने परेशानी बढ़ा दी है। वहीं अब समिति स्तर पर प्रतिदिन खरीदी की लिमिट कम किए जाने की वजह से सिंचित क्षेत्र के उपार्जन केंद्रों से लाभान्वित होने वाले किसानों की समस्या बढ़ गई है। करतला, कोरबा ब्रांच के आधा दर्जन केंद्रों से अधिक उपार्जन केंद्रों में इस बदइंतजामी से किसान परेशान नजर आ रहे हैं। बरपाली ब्रांच के उपार्जन केंद्र फरसवानी ,सोहागपुर , कराईनारा,पठियापाली तिलकेजा में टोकन कटाने पहुंचे सीमांत दीर्घ किसान निराश वापस लौटते नजर आ रहे हैं। इसकी वजह से खरीदी की रफ्तार मंद पड़ गई है।नियमानुसार धान खरीदी के लिए 70 प्रतिशत टोकन 2 स्तर पर काटे जा रहे। 70 फीसदी तुंहर हाथ ऐप से टोकन काटे जा रहे तो वहीं 30 फीसदी टोकन समिति स्तर पर काटे जा रहे हैं। समिति स्तर पर काटे जा रहे टोकन धान खरीदी की लिमिट कम होने की वजह से अपेक्षाकृत नहीं कट पा रहे। 2 एकड़ से कम धान का रकबा वाले लघु किसानों के लिए सिंगल टोकन काटे जाने का प्रावधान है ,जिन्हें दिक्कतें नहीं आ रही। लेकिन 2 से 10 एकड़ के सीमांत एवं 10 एकड़ से अधिक रकबा वाले दीर्घ (बड़े) किसानों के लिए टोकन कटना मुश्किल हो रहा है। सीमांत किसान 2 तो दीर्घ किसान 3 टोकन कटा सकते हैं। लेकिन प्रतिदिन धान खरीदी की लिमिट कम होने से समिति से कई किसानों को निराश वापस लौटना पड़ रहा है। फरसवानी में बीते वर्ष धान खरीदी की लिमिट प्रतिदिन 1500 क्विंटल की थी जो इस वर्ष बढाने की बजाय,एक बार लिमिट बढ़ने पर भी 1200 क्विंटल ही है। वर्तमान में किसानों की समस्या ,धान खरीदी की धीमी रफ्तार को देखते हुए 1700 क्विंटल प्रतिदिवस खरीदी लिमिट की बात कही जा रही। 53 हजार क्विंटल के लक्ष्य की पूर्ति में 924 किसानों में से 270 किसानों ने ही 14 हजार 862 क्विंटल धान बेचा है। 654 शेष किसानों के माध्यम से तय लक्ष्य की पूर्ति करने समिति परेशान है। गौरतलब हो गत वर्ष इस समयावधि में 22 हजार 822 क्विंटल की धान खरीदी हो चुकी थी। सोहागपुर में भी लिमिट कम होने से किसान नाराज नजर हैं। कराईनारा में 1200 क्विंटल की मांग पर खरीदी लिमिट 800 क्विंटल किए जाने पर टोकन नहीं कटने,एवं बिक्री रकबा में कटौती से परेशान किसानों ने नाराजगी जाहिर की। यहां 32 हजार क्विंटल के लक्ष्य की पूर्ति में 383 पंजीकृत किसानों में से 119 किसानों से 8 हजार 477 क्विंटल ही धान बेचा है,अभी भी 269 किसानों के माध्यम से शेष करीब 60 फीसदी लक्ष्य की पूर्ति करने समिति को आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। उपार्जन केंद्र पठियापाली में भी टोकन कटाने पहुंचे किसान निराश वापस लौटते दिखे। उन्होंने समिति की खरीदी लिमिट 1000 क्विंटल को बढ़ाकर 1500 से अधिक किए जाने की बात कही ताकि किसानों को समितियों का चक्कर न काटना पड़े। यहाँ 40 हजार क्विंटल धान खरीदी के लक्ष्य की पूर्ति में 591 किसानों में से 199 किसानों के माध्यम से 10 हजार 500 क्विंटल धान की ही आवक हुई है। 392 किसान अभी भी धान नहीं बेच सके हैं। जिनसे शेष 75 फीसदी खरीदी लक्ष्य की पूर्ति की चिंता समिति के कर्मचारियों को सता रही है। तुमान, चिकनीपाली में भी लिमिट बढ़ाए जाने की बात कही गई। उपार्जन केंद्र तिलकेजा में तो समिति की लिमिट महज 1 हजार क्विंटल होने की वजह से प्रतिवर्ष शासन को समर्थन मूल्य पर 450 क्विंटल धान बेचने वाले बिलासपुर से टोकन कटवाने पहुंचे मूलत: भैसमा निवासी किसान को निराश वापस लौटना पड़ा।उन्होंने भी इस अव्यवस्था ,अदूरदर्शिता पर नाराजगी जताते हुए ख़रीदी लिमिट बढ़ाए जाने की बात कही।
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22 लाख 41 हजार 495 क्विंटल धान की खरीदी शेष
जिले में 26 दिसंबर तक कि स्थिति में 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 8 लाख 78 हजार 145 क्विंटल धान की खरीदी हुई है। खरीदे गए धान की कीमत समर्थन मूल्य (2300 रुपए प्रति क्विंटल की दर ) पर 201करोड़ 97 लाख 34 हजार 880 रुपए की है। शासन द्वारा 3100 रुपए की दर से धान खरीदी किए जाने की बात कही गई है। शेष 800 रुपए प्रति क्विंटल के अंतर राशि बोनस के तौर पर शासन पृथक से किसानों के खाते में जारी करेगी। इस लिहाज से देखें तो अब तक खरीदे गए धान के लिए 70 करोड़ 25 लाख 16 हजार 480 रुपए की राशि बोनस के तौर पर दी जाएगी। समर्थन मूल्य बोनस की कुल राशि को जोड़ दें तो अब तक 272 करोड़ 22 लाख 51 हजार 360 रुपए की धान खरीदी हो चुकी है। लेकिन लिमिट की पेंच में मंद पड़ी धान खरीदी अभियान में इस साल जिला तय लक्ष्य से पहली बार अभी से काफी दूर जाता नजर आ रहा है। अभी तक 30 फीसदी धान की भी आवक नहीं हुई है। तय लक्ष्य की पूर्ति के लिए शेष बचे 22 लाख 41 हजार 495 क्विंटल धान की खरीदी के लिए शेष बचे 24 खरीदी कार्यदिवस में 93 हजार 395 .62 क्विंटल धान प्रतिदिन खरीदना होगा। जो आसान नहीं लग रहा।

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