नहीं बना ऐलीफेंट कॉरिडोर, आखिर कैसे रूकेगा हाथी-मानव द्वंद
कोरबा। कोरबा और कटघोरा वनमंडल में हाथियों का उत्पात बढ़ता जा रहा है। हाथी लगातार जन हानि पहुंचा रहे हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए प्रदेश सरकार ने एलीफेंट कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है, लेकिन कार्य की रफ्तार इतनी सुस्त है कि यह कब तक पूरा होगा? इसका अता पता नहीं है। कॉरिडोर के तहत हाथियों के रहवास क्षेत्र को चिन्हिंत कर उनके लिए जंगल में चारा पानी की व्यवस्था करना प्रमुख है। प्रदेश सरकार ने 2018 के विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि पांच साल में लेमरू ऐलीफेंट कॉरिडोर का काम पूरा किया जाएगा। अब चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। साल के अंत में विधानसभा के चुनाव हैं। एलीफेंट कॉरिडोर का काम पूरा नहीं हो सका है और अब इस साल पूरा होने की उम्मीद भी नहीं है।कटघोरा वनमंडल का केंदई वनपरिक्षेत्र हाथियों के उत्पात से परेशान हैं, लेकिन अब तक इस रेंज में लेमरू ऐलीफेंट कॉरिडोर के तहत काम अधर में है। कॉरिडोर की प्लांनिग के तहत वनमंडल कार्य नहीं करा पा रहे हैं। बताया जाता है कि इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह फंड देरी से और कम स्वीकृत किया जाना है। कोरबा, रायगढ़, सरगुजा जिले के कुल 11 रेंज को इस दायरे में शामिल किया गया है। कोरबा जिले में हाथियों का उत्पात बढ़ रहा है लेकिन जंगल में चारा-पानी उपलब्ध कराने के लिए जरूरी बजट के आबंटन में कमी है।
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