Sunday, February 22, 2026

निजी विद्यालयों के लिए प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें न पढ़ाने की गाइडलाइन का किया जाए पालन, नागरिक जन सेवा समिति अध्यक्ष आरबी ने लिखा पत्र

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निजी विद्यालयों के लिए प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें न पढ़ाने की गाइडलाइन का किया जाए पालन, नागरिक जन सेवा समिति अध्यक्ष आरबी ने लिखा पत्र

 

कोरबा। नागरिक जन सेवा समिति के अध्यक्ष मो. न्याज नूर आरबी ने पत्र में मांग करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ के राजधानी जिला रायपुर में जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी स्कूलों के लिए गाइड लाइन जारी की है। जिसके अंतर्गत अब निजी स्कूल प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें नहीं पढ़ाएंगे। जारी गाइड लाइन के मुताबिक रायपुर के निजी स्कूल के पास जिस बोर्ड की मान्यता है उसी बोर्ड की किताबें पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है।आरबी ने कहा कि स्टेट बोर्ड के लिए एससीईआरटी और सीबीएसई की किताबें अनिवार्य कर दी गई है, जबकि आईसीएसई बोर्ड के लिए एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य की गई है। आदेश के मुताबिक अब सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों को केवल एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई करानी होगी, जबकि छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों को पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा निर्धारित एससीईआरटी और सीबीएसई की किताबें पढ़ानी होंगी। बता दें कि 25 जून के आदेश में 8 बिन्दुओं के निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं इस आदेश का उल्लंघन करने यानी आदेश का पालान नहीं करने पर शिक्षा के अधिकार 2009 के तहत कार्रवाई की जाएगी। आदेश में ये भी कहा गया है कि निजी स्कूल यूनिफॉर्म से जुड़े किसी भी वस्तु जैसे जूते, मोजे, बैग, टाई, बेल्ट, नोटबुक आदि की बिक्री परिसर में नहीं कर सकेंगे और न ही किसी खास दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जाएगा। आरबी का कहना है कि 16 जून से विद्यालय का शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और स्कूल के शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 15 दिन बाद यह आदेश जारी करने से सभी पालकों पर नए किताबों को खरीदने से वित्तीय भार भी पड़ेगा और गलत मनमानी ढंग से जो किताबें सभी विद्यालय प्रबंधन ने खरीदने के लिए दबाव बनवाकर खरीदवा कर वित्तीय भार पालकों पर डाला है। उस पर पूर्णत: हजारों रुपयों की पुस्तकें व अन्य सामग्री को वापस करवाते हुए सभी पालकों को खर्च की गईं राशि वापस कराई जाए। जिला प्रशासन, जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से पूर्व के शासकीय आदेश का पालन न करने वाले सभी निजी विद्यालयों पर तुरंत अपराध दर्ज कराते हुए कड़ी से कड़ी वैधानिक व शासकीय कारवाई की की मांग की गई है। यह आदेश लाखों पालकों को राहत देते हुए हमेशा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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