Friday, February 13, 2026

नैतिक शिक्षा ही मानव को ‘मानव’ बनाती है-भगवान भाई, न्यू एरा प्रोगेसिव स्कूल और साड़ा कन्या शाला में कार्यक्रम का आयोजन

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नैतिक शिक्षा ही मानव को ‘मानव’ बनाती है-भगवान भाई, न्यू एरा प्रोगेसिव स्कूल और साड़ा कन्या शाला में कार्यक्रम का आयोजन

कोरबा। शिक्षा का मूल उद्देश्य हैं चरित्र का निर्माण करना, असत्य से सत्य की ओर ले जाना, बंधन से मुक्ति की ओर जाना लेकिन आज की शिक्षा भौतिकता की ओर ले जा रही है । भौतिक शिक्षा से भौतिकता की प्राप्ति होती है और नैतिक शिक्षा से चरित्र बनता है । इसलिए वर्तमान के समय प्रमाण भौतिक शिक्षा के साथ साथ बच्चों को नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है । नैतिक शिक्षा ही मानव को ‘मानवÓ बनाती है क्योंकि नैतिक गुणों के बल पर ही मनुष्य वंदनीय बनता है।सारी दुनिया में नैतिकता अर्थात सच्चरित्रता के बल पर ही धन-दौलत, सुख और वैभव की नींव खड़ी है। उक्त उदगार माउंट आबू राजस्थान से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने व्यक्त किए। वे न्यू एरा प्रोग्रेसिव स्कूल और शासकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय साड़ा में विद्यार्थियों और शिक्षकों के जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर बोल रहे थे । भगवान भाई ने कहा कि विद्यार्थियों को मुल्यांकन, आचरण, अनुकरण, लेखन, व्यवहारिक ज्ञान इत्यादि पर जोर देना होगा। वर्तमान के समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण है। परीक्षा के समय अपनी सकारात्मक सोच रखें । परीक्षा का डर मन से निकालिए । समय का सदुपयोग करे 7अपना हैण्ड रायटिंग अच्छा और स्पष्ट लिखे । किसी का कापी राइट ना करे आत्मविश्वास से लिखे । उन्होंने बताया कि परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं । शिक्षा एक बीज है और जीवन एक वृक्ष है जब तक हमारे जीवन रूपी वृक्ष में गुण रूपी फल नहीं आते तब तक हमारी शिक्षा अधूरी है । समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम, सद्भावना, भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से संचालित होता हैं। उन्होंने कहा कि भौतिक शिक्षा से भौतिकता का विकास होगा और नैतिक शिक्षा से सर्वागिंण विकास होगा । नैतिक शिक्षा से ही हम अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते है जो आगे चलकर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविवेक व आत्मबल प्रदान करता है ।
प्रिंसिपल डी एन राव ने भी अपना उद्बोधन देते हुए कहा की नैतिक शिक्षा से ही छात्र-छात्राओं में सशक्तिकरण आ सकता है। उन्होंने आगे बताया कि नैतिकता के बिना जीवन अंधकार में हैं। नैतिक मूल्यों की कमी के कारण अज्ञानता, सामाजिक, कुरीतियां व्यसन, नशा, व्यभिचार आदि के कारण समाज पतन की ओर जाता है। चांपा ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवाकेंद्र की प्रभारी बी.के रचना बहन ने कहा कि जब तक जीवन में आध्यात्मिकता नही है तब तक जीवन में नैतिकता नही आती है। आध्यात्मिकता की परिभाषा बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं को जानना पिता परमात्मा को जानना और उसको याद करना ही आध्यात्मिकता है। जिसको राजयोग कहते है । राजयोग को अपनी दिनचर्या का अंग बनाने की अपील की । बी के भारती बहन ने ब्रह्माकुमारी संस्था का विस्तार से परिचय भी दिया । प्रिंसिपल रणधीर सिंह ने शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की शुरुवात स्वागत से की गयी और अंत में बी के भगवान भाई ने मन की एकाग्रता बढाने हेतु राजयोग मेंडिटेशन भी कराया । कार्यक्रम में , बी के कमल कर्माकर, बी के खिलेश्वर भाई बीके श्यामराव भाई आदि सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे।

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