Sunday, February 8, 2026

पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में हो रहा बदलाव, दो दिन बाद से पारा चढ़ेगा, होली से पहले ठंड से राहत, बार-बार बदलते मौसम का सेहत पर असर, कभी गर्म कपड़े भारी लगते हैं, तो कभी बिना स्वेटर के ठंड लगती है सताने

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कोरबा। इस साल मौसम कुछ अलग ही तेवर दिखा रहा है। कभी उत्तर दिशा से आने वाली शुष्क और ठंडी हवाएं लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर देती हैं, तो कभी अचानक सक्रिय हो जाने वाला पश्चिमी विक्षोभ तापमान को बढ़ा देता है। नतीजा यह है कि कभी ठंड का तेज अहसास होता है, तो कभी मौसम सामान्य से ज्यादा गर्म लगने लगता है। इस उतार-चढ़ाव ने लोगों को हैरान कर दिया है और अब इसका असर सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन न्यूनतम तापमान में कोई परिवर्तन नहीं होगा, लेकिन उसके बाद क्रमश: 2 से 3 डिग्री की वृद्धि होगी। होली से पश्चिमी विक्षोभ रात के तापमान को बढ़ा देगा। पहले फरवरी के तीसरे सप्ताह आते-आते ठंड से काफी राहत मिल जाएगी। पिछले पखवाड़े भर से मौसम का यह अजीब मिजाज लगातार बना हुआ है। सुबह-सुबह अच्छी ठंड लगती है, दोपहर में हल्की गर्मी महसूस होती है और रात होते-होते फिर मौसम बदल जाता है। लोग समझ नहीं पा रहे कि आखिर मौसम के अनुसार खुद को कैसे ढालें। कभी गर्म कपड़े भारी लगते हैं, तो कभी बिना स्वेटर के ठंड सताने लगती है। इस बदलते मौसम का असर लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से वातावरण में नमी बढ़ जाती है। यही नमी रात के न्यूनतम तापमान को ऊपर ले जाती है, जिससे रात का तापमान अपेक्षाकृत गर्म हो जाता है। वहीं दिन के समय उत्तर से आने वाली ठंडी हवाएं बनी रहती हैं, जिससे दिन और रात के तापमान में फर्क साफ नजर आता है। जनवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर अब तक पांच पश्चिमी विक्षोभ इस क्षेत्र से गुजर चुके हैं। इनके कारण तापमान में बार-बार बदलाव हो रहा है। यही वजह है कि मौसम स्थिर नहीं रह पा रहा। यह स्थिति अभी कुछ समय तक बनी रह सकती है। अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद करीब दो डिग्री तक बढ़ोतरी की संभावना है।
पश्चिमी विक्षोभ क्या है?
पश्चिमी विक्षोभ एक प्रकार का मौसम तंत्र होता है, जो कैस्पियन सागर के आसपास बनता है। यहां ठंडी और गर्म नम हवाओं के मिलने से कम दबाव का क्षेत्र बनता है। यही सिस्टम ऊंचाई पर बहने वाली तेज हवाओं के साथ धीरे-धीरे पूर्व दिशा में बढ़ता है और ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान होते हुए भारत पहुंचता है। सर्दियों में यही सिस्टम बारिश, बर्फबारी और ठंड बढ़ाने का कारण बनता है।

मौसम चाहे जैसा भी हो, सतर्कता, समझदारी जरुरी
लगातार बदलते तापमान का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। सर्दी-खांसी, गले में खराश, बुखार और थकान के मामले बढ़ रहे हैं। कई लोगों की परेशानी जल्दी ठीक नहीं हो रही, जिससे वे लंबे समय तक असहज महसूस कर रहे हैं। इस समय बदलते मौसम के अनुसार कपड़े पहनना, पर्याप्त पानी पीना और संतुलित भोजन करना बेहद जरूरी है। बुजुगों और बच्चों को खास सावधानी रखने की जरूरत है। सुबह-शाम ठंड से बचाव करें, अनावश्यक ठंडी हवा से बचें और नियमित दिनचर्या अपनाएं। मौसम चाहे जैसा भी हो, थोड़ी सतर्कता और समझदारी अपनाकर हम अपनी सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं।

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