प्रधानमंत्री आवास में वेटिंग लिस्ट वाले हितग्राहियों को मौका मिलेगा, कई लोगों के आवास होंगे निरस्त, की गई दावा आपत्ति
कोरबा। जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 1 लाख 2864 आवास बनाने का लक्ष्य है। जिसमें से अभी तक 64837 आवासों की मंजूरी ही मिली है। इसमें से 50 हजार 78 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं। 14759 आवासों का निर्माण नहीं हो सका है।पीएम आवास के बहुत सारे हितग्राही हैं जो या तो पलायन कर चुके हैं या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी है। ऐेसे हितग्राहियों के आवास अब निरस्त होंगे। लंबे समय से इन आवासों का काम शुरु नहीं हो पा रहा है। इनके आवास निरस्त करने के बाद वेटिंग लिस्ट वाले हितग्राहियों को मौका मिलेगा।
बीच में फंड की कमी के अलावा हितग्राहियों के सामने नहीं आने के कारण निर्माण अटके हुए थे। साथ ही वर्ष 2021-22 में तो आवास की मंजरी ही नहीं मिल पाई थी। इस वजह से मकान अधूरे हैं पीएम आवास योजना की शुरुआत वर्ष 2016-17 में शुरू हुई थी। उस समय 2011 की जनगणना के आधार पर 1 लाख 2864 को ही पात्र बताया गया था। इसी सूची के आधार पर ही लक्ष्य मिलने पर हितग्राहियों को राशि जारी की जाती है। जब शुरुआत हुई उस वर्ष 12501 आवासों की मंजूरी मिली थी। लेकिन 7 साल बाद भी 376 आवास अधूरे हैं। कई लोगों ने तो राशि निकालने के बाद काम ही नहीं कराया। इसकी जांच भी कराई गई थी। जिन लोगों ने राशि निकालने के बाद आवास नहीं बनाया उनसे वसूली का भी प्रावधान है।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अतर्गत विभिन्न कारणों से अपात्र हितग्राहियों का स्वीकृति अस्थायी रूप से निरस्त किया जाना है। इसके लिए 5 जनवरी को दावा आपत्ति मंगाई गई थी। स्वीकृत आवास के हितग्राहियों में से विभिन्न कारणों (सरकारी नौकरी, मृत नॉमिनी नही, स्थायी पलायन) अस्थायी पलायन एवं हितग्राही की मृत्यु नॉमिनी पलायन, अन्य ऐसे हितग्राहियों की स्वीकृति अस्थायी रूप से निरस्त किया जाना है।सरकार बदलने के बाद अब राज्य शासन ने 25 करोड़ 38 लाख रुपए की राशि जारी की है। इससे काम शुरु हो सका है। इसके बाद भी आवास निर्माण की गति धीमी है। प्रदेश में भाजपा की फिर सरकार बनने के बाद आवास निर्माण को ही प्राथमिकता दी जा रही है। इसके बाद फिर से राशि जारी होने लगी है। हितग्राहियों का कहना है कि समय पर राशि मिल जाती तो 2 महीने में मकान तैयार हो जाता। अब तो सीमेंट और छड़ का रेट भी बढ़ गया है। लेकिन राशि वही है। इसकी वजह से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
![]()

