कोरबा। युवक के सिर से महज छह साल की उम्र में माता पिता का साया उठ गया। उसे रिश्ते के दादा ने पाल पोसकर बड़ा किया। वह जवानी की दहलीज पर कदम रखते रखते इस कदर नशे का आदी हो गया कि उस पर रिश्तेदारों की समझाईश का भी असर नही पड़ा। उसने नशे के लिए दादा सहित नाते रिश्तेदारों से दूरी बना ली। वह एकाकी जीवन जीने लगा। आखिरकार नशे की लत के कारण गंभीर बीमारी ने उसकी जान ले ली। उसका शव दो दिनों तक मर्चुरी में पड़ा रहा। जानकारी होने पर सामने आए नाते रिश्तेदारों ने न सिर्फ मृतक की पहचान की, बल्कि वैधानिक कार्रवाई उपरांत शव गृहग्राम ले गए। यह रूपहले पर्दे पर दिखाई जाने वाली फिल्मी कहानी का अंश नहीं, बल्कि हकीकत है। दरअसल सत्यम सारथी नामक 21 वर्षीय युवक का उपचार कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा था, जहां से उसकी हालत नाजुक होने पर 10 फरवरी को डॉक्टरों ने सत्यम को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। उसकी दो दिनों तक चले उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई। अस्पताल में मृतक के परिजन नहीं थे, लिहाजा शव को लावारिस मानते हुए मर्चुरी में शिफ्ट करा दिया गया। मेमों मिलने पर अस्पताल पुलिस ने मृतक की पहचान के लिए प्रयास तेज कर दिए। इसके लिए थाना चौकी प्रभारियों को इत्तिला किया गया। जानकारी होने पर कटघोरा थाना क्षेत्र के ग्राम पूछापारा में रहने वाले कुछ ग्रामीण शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। ग्रामीणों में शामिल होरीलाल सारथी नामक बुजुर्ग ने मृतक की पहचान अपने पोते सत्यम के रूप में कर ली। पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि सत्यम के सिर से महज छह साल की उम्र में माता पिता का साया उठ चुका था। वह अपने परिवार में अकेले था।
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