बढ़ती जा रही बिजली की डिमांड, प्रस्तावित संयंत्रों का धरातल पर अब तक काम शुरू नहीं, अप्रेल 2024 से बिजली की डिमांड छह हजार मेगावाट को कर जाएगी पार

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बढ़ती जा रही बिजली की डिमांड, प्रस्तावित संयंत्रों का धरातल पर अब तक काम शुरू नहीं, अप्रेल 2024 से बिजली की डिमांड छह हजार मेगावाट को कर जाएगी पार

कोरबा। प्रदेश में बिजली की डिमांड साल दर साल बढ़ती जा रही है। आगामी वर्षों में यह मांग 6000 मेगावॉट के पार पहुंच जाएगी।पावर कंपनी के प्रस्तावित संयंत्रों का धरातल पर अब तक काम शुरू तक नहीं हुआ है। 1320 मेगावाट क्षमता संयंत्र के लिए इस महीने जनसुनवाई होनी थी, चुनाव आचार संहिता के कारण जन सुनवाई टल गई। इसके बाद कई प्रक्रिया पूरी करने के बाद काम शुरु होगा। इसमें कम से कम चार से पांच महीने का समय लग जाएगा। इसी तरह पंप स्टोरेज तकनीक के संयंत्रों का अभी सिर्फ सर्वे ही हो सका है। इन सभी संयंत्रों से बिजली पांच से छह साल बाद मिलेगी।
सीईए द्वारा 2023-24 में हुए खपत के आधार पर सभी राज्यों में आगामी वर्ष बिजली की डिमांड को लेकर आंकलन कर राज्यों को रिपोर्ट भेजी गई थी। बीते कुछ वर्षों में प्रदेश में बिजली की डिमांड लगातार बढ़ी है। दो साल पहले तक डिमांड चार हजार मेगावाट औसत से बढक़र अब औसत 5500 मेगावाट तक जा पहुंची है। इस वर्ष पीक अवधि में डिमांड पहली बार रिकॉर्ड तोड़ते हुए 5900 मेगावाट तक जा पहुंची थी। जो कि अब तक का सर्वोच्च है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकलन के मुताबिक अप्रेल 2024 से बिजली की डिमांड छह हजार मेगावाट को पार कर जाएगी। जिस तरह से वर्तमान वर्ष में न्यूनतम 3800 और अधिकतम 5900 मेगावाट की डिमांड गई है। इसी तरह आने वाले न्यूनतम 5781 और अधिकतम 6776 मेगावाट तक डिमांड जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में उत्पादन कंपनी की कुल क्षमता 2840 मेगावाट है।

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