कोरबा। बरमपुर-दर्री बैराज तक 8.20 किलोमीटर टू लेन सड़क बनाने 127 लोगों को कब्जा हटाने नोटिस जारी किया गया है। यही नहीं मलबे मुआवजा देने के लिए 2.9 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस सड़क की लागत 83 करोड़ है। सड़क के लिए 53 करोड़ और पुल के लिए 17 करोड़ का टेंडर जारी हुआ है। शहर से गुजरी दायीं और बायीं तट नहर के दोनों ओर 20 से 50 मीटर जमीन बेजा कब्जा की भेंट चढ़ गई। शहर के बीच से 12 किलोमीटर लंबी नहर गुजरी है। दूसरी ओर नहर की निगरानी के लिए पूरा अमला है, लेकिन किसी ने बेजा कब्जा रोकने का प्रयास नहीं किया। अब जमीन की जरूरत – पड़ने पर हटाने के लिए मुआवजा भी देखना पड़ रहा है। दर्री बराज से 40 साल पहले दायीं और बायीं तट नहर सिंचाई के लिए बनाई गई है। यहां से नहर जांजगीर-चांपा जिले के चंद्रपुर और शिवरीनारायण तक गई है। शहर में नहर किनारे दायीं तट नहर प्रगतिनगर होते हुए बरमपुर, सर्वमंगला होते हुए कनकी तक गई है। बाईं तट नहर कोहड़िया से होते हुए 15 ब्लॉक, पंप – हाउस, टीपीनगर, राताखार, – तुलसीनगर, इमलीडुग्गू, संजय नगर, सीतामढ़ी से आगे बरबसपुर – उरगा से होकर आगे निकलती है। इसके किनारे ही अब कई बस्तियां बस गई हैं। लोगों ने पक्के मकान भी बना लिए हैं। यहां तक कि नहर के ऊपर को भी लोग बेजा कब्जा कर रहे हैं। इसके बाद भी विभाग के अधिकारी कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। रास्ते को घेरकर रखा गया है। इसकी जानकारी लोगों ने अफसरों को दी थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। निगम ने यातायात के दबाव को कम करने के लिए सुनालिया नहर पुल से लेकर राताखार पुल तक सड़क बनाने सर्वे किया है। शुरुआत में ही दुकानें बन गई है।
बेजा कब्जा हटाने के लिए मशक्कत
जिले के हिस्से में दायीं तट नहर 23 किलोमीटर तक दर्री उप संभाग के जिम्मे है। साथ ही बायीं तट नहर 32 किलोमीटर आता है। इसके आगे का हिस्सा जांजगीर-चांपा जिले में आता है, लेकिन यहां के अधिकारी शहर की जमीन को भी नहीं बचा पाए। जिसकी वजह से ही अब बेजा कब्जा हटाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
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