Sunday, February 1, 2026

मतदाता सूची से अल्पसंख्यक मतदाताओं को हटाने की साजिश, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर सहित मुख्य चुनाव आयुक्त से की शिकायत

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कोरबा। विधानसभा कोरबा क्षेत्र में मतदाता सूची के शुद्धिकरण (एसआईआर) की प्रक्रिया की आड़ में जो कुछ हो रहा है, वह एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करने की सुनियोजित राजनीतिक साजिश है। विश्वसनीय तथ्यों व सामने आए दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो चुका है कि फॉर्म 7 का बड़े पैमाने पर फर्जी और आपराधिक दुरुपयोग कर विशेष अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया है। यह कृत्य भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 व 326 की खुली अवहेलना उपर्युक्त तथ्यों को संज्ञान में लाते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर के साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग और प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखा है।
पत्र में उल्लेख है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित लगभग 55 पृष्ठों की सूची में 1566 मतदाताओं के नाम विलोपन के लिए चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से लगभग 98 प्रतिशत मतदाता एक ही अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित हैं। यह आंकड़ा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि पूर्वाग्रह से प्रेरित संगठित षड्यंत्र है। जिन मतदाताओं के नाम और इपिक नंबर से फॉर्म-7 दाखिल किया गया, उन्हें इसकी कोई जानकारी तक नहीं है। उनके नाम का दुरुपयोग कर झूठा लिखा गया कि वे उस पते पर निवास नहीं करते या स्थायी रूप से अन्यत्र चले गए हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत है। यह कृत्य जालसाजी, कूटरचना, पहचान की चोरी और नागरिकों के मताधिकार पर डकैती के समान है।
पहले ही दी गई थी चेतावनी
श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पूर्व में भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर इस षडयंत्र की आशंका से अवगत कराया था। उन्होंने बताया था कि एक राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर उसके कार्यकर्ता फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर रहे हैं। दुर्भाग्यवश उस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया।

यह है प्रमुख मांगें
0 कोरबा विधानसभा क्षेत्र में प्राप्त सभी फॉर्म-7 आवेदनों की शत प्रतिशत घर-घर जाकर भौतिक व दस्तावेजी जांच कराई जाए।
0 यह सार्वजनिक किया जाए कि किस व्यक्ति या संगठन ने किसके निर्देश पर यह फर्जीवाड़ा किया।
0 जिन मामलों में फर्जी या कूटरचित फॉर्म-7 पाए जाएं, वहाँ आईपीसी, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950/1951 तथा आईटी अधिनियम के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई हो।
0 यदि किसी बीएलओ, सुपरवाइजर या निर्वाचन तंत्र के अधिकारी, कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाए तो उसके विरुद्ध विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
0 जांच पूर्ण होने तक सभी विवादित विलोपन प्रक्रियाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए।

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