कोरबा। मनरेगा में किए गए बदलाव के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोला। कलेक्ट्रेट घेराव के तहत कोसाबाड़ी से लेकर दो बैरिकेट्स तोड़ते हुए तीसरी बैरिकेट्स के पास पहुंच गए थे। जहां राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में यथावत बनाए रखने एवं केंद्र सरकार द्वारा किए गए जनविरोधी परिवर्तनों को वापस लिए जाने की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भारतीय लोकतंत्र का एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कानून है, जिसने ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों को सम्मानजनक रोजगार का कानूनी अधिकार प्रदान किया है। यह अधिनियम केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, श्रमिकों एवं वंचित वर्गों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार रहा है। दुर्भाग्यवश, वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में ऐसे परिवर्तन किए जा रहे हैं, जिससे इस अधिनियम की आत्मा को कमजोर किया जा रहा है। मनरेगा को एक संवैधानिक अधिकार से हटाकर एक सीमित प्रशासनिक योजना में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों के काम के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी निर्धारण एवं भुगतान में बढ़ती अनिश्चितता, कार्य आवंटन में देरी, पंचायतों एवं ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों में कटौती, ठेकेदारी व्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दिए जाने तथा राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसी नीतियां इस कानून के मूल उद्देश्यों के विपरीत हैं। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी, मजदूरों का पलायन, सामाजिक असुरक्षा एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कमजोर होने की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने देश के सबसे कमजोर तबकों को न केवल रोजगार की गारंटी दी है, बल्कि ग्रामीण भारत में सामाजिक न्याय, समानता और गरिमा की भावना को भी सुदृढ़ किया है। उन्होंने मांग की है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में यथावत बनाए रखा जाए। मनरेगा के अंतर्गत पंचायतों एवं ग्राम सभाओं को पूर्व की भांति योजना निर्माण, क्रियान्वयन एवं निगरानी के पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्रदान किए जाएँ। वर्तमान महंगाई एवं जीवन-यापन की वास्तविक लागत को देखते हुए मनरेगा के अंतर्गत न्यूनतम मजदूरी 400/- रुपये प्रतिदिन निर्धारित करने की कृपा की जाए।इस अवसर पर ज्योत्सना चरण दास महंत, पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल, जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान, जिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष मुकेश राठौर, नगर पालिका परिषद कटघोरा अध्यक्ष राज जायसवाल, नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास सहित अन्य कांग्रेसी सैकड़ो के तादाद में शामिल थे। सांसद के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम डिप्टी कलेक्टर तुलाराम भारद्वाज को ज्ञापन सौंपा गया।
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