Monday, March 2, 2026

महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी ग्रामीण ने आदर्श आचार संहिता किया खुलेआम उल्लंघन, आदर्श आचार संहिता लागू होने के दो दिन बाद दिया प्रभार

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महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी ग्रामीण ने आदर्श आचार संहिता किया खुलेआम उल्लंघन, आदर्श आचार संहिता लागू होने के दो दिन बाद दिया प्रभार

विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी छत्तीसगढ़ में अफसर निर्वाचन आयोग को चुनौती दे रहे। आचार संहिता के कड़े नियमों को धत्ता बताते हुए बैखोफ अफसर आचार संहिता लागू होने के बाद भी भारमुक्त व जॉइनिंग की प्रक्रिया जारी रही। इसी तरह का एक मामला कार्यालय, परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना कोरबा (ग्रामीण) में सामने आया है। जहां आचार संहिता लागू होने के 2 दिन बाद 11 अक्टूबर को भारमुक्त व जॉइनिंग का आदेश जारी किया गया है। निर्वाचन आयोग द्वारा 9 अक्टूबर दोपहर 12 बजे से आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है। इसके बाद भी नियमों को धता बताने का खेल जिले में खेला जा रहा है।
मामला इस तरह है कि छ.ग. शासन महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय, महानदी भवन नया रायपुर अटल नगर जिला – रायपुर का आदेश कमांक / एफ 1-46 / मवावि / 50 नया रायपुर अटल नगर दिनांक 09.10.2023 के द्वारा गायत्री देवी का एकीकृत बाल विकास परियोजना- चोटिया से एकीकृत बाल विकास परियोजना- कोरबा (ग्रामीण) किया गया है। इसी तरह उषा सिंह चौहान का एकीकृत बाल विकास परियोजना- कोरबा (ग्रामीण) से एकीकृत बाल विकास परियोजना- चोटिया स्थानांतरण किया गया। जिस पर कार्यालय, परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना कोरबा (ग्रामीण) ने दो दिन बाद 11 अक्टूबर को आदेश जारी किया कि श्रीमती गायत्री देवी निर्मलकर पर्यवेक्षक एकीकृत बाल विकास परियोजना चोटिया का स्थानांतरण एकीकृत बाल विकास परियोजना कोरबा ग्रामीण होने के फलस्वरूप संबंधित के द्वारा इस कार्यालय में दिनांक 11.10.2023 को कार्यभार ग्रहण किया गया । इस कार्यालय पदस्थ श्रीमती उषा चौहान पर्यवेक्षक का स्थानातरण एकीकृत बाल विकास परियोजना चोटिया जिला कोरबा होने के फलस्वरूप उन्हे आंबटित सेक्टर दोदरी का संपूर्ण प्रभार नवीन पदस्थ पर्यवेक्षक श्रीमती गायत्री देवी निर्मलकर को आगामी आदेश पर्यन्त तक एतद् द्वारा सौपा जाता है। आचार संहिता के बाद भी इस तरह प्रभार देने का खेल खेला जा रहा है। परियोजना अधिकारी ने आचार संहिता का उल्लंघन करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। मौखिक तो दूर लिखित आदेश निकालकर उन्होंने आचार संहिता का मखौल उड़ाने का काम किया है। यह बात समझ से परे है कि अगर तबादले किए जाने थे तो इतना विलंब क्यों किया गया ?क्या आचार संहिता लागू होने के बाद यह आदेश जारी हुए?अधिकारी कर्मचारी किस तरह भारमुक्त हुए ?विश्वस्त सूत्रों के अनुसार उच्च अधिकारियों को चढ़ावा देकर आचार संहिता लागू होने के बाद भारमुक्त व जॉइनिंग देते रहे। निर्वाचन आयोग की ढिलाई भी साफ तौर पर उजागर हुई। निश्चित तौर पर सवाल उठेंगे तो विभाग को जवाब के लिए तैयार रहना होगा।

वर्सन

संबंधितों का स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका था। जिनको प्रभार दिया गया है। प्रभार नहीं देते तो आंगनबाड़ी काम कैसे चलता। यह आचार संहिता का उल्लंघन के दायरे में नहीं आता।

ममता तुली,
परियोजना अधिकारी, एकीकृत बाल विकास परियोजना कोरबा (ग्रामीण)

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