Tuesday, February 10, 2026

मार्च से ढाई लाख स्कूली बच्चों को मिड डे मील में मिलेगा महुआ लड्डू, महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगी लड्डू बनाने की जिम्मेदारी

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कोरबा। जिले के सरकारी प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों में पढ़ने वाले करीब ढाई लाख बच्चों को अब महुआ का लड्डू भी दिया जाएगा। इस नई पहल का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना है। योजना के तहत वन विभाग छह वनधन विकास केंद्र के माध्यम से फूड ग्रेड महुआ की खरीदी करेगा और इसे महिला स्व-सहायता समूहों को निशुल्क उपलब्ध कराएगा। महिला समूह महुआ से लड्डू तैयार कर शिक्षा विभाग को आपूर्ति करेंगे। लड्डू सप्ताह में एक दिन मिड डे मील के साथ वितरित किए जाने पर विचार किया जा रहा है। जंगल के वनोपज का अधिक से अधिक लोगों को लाभ दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट योजना शुरू की है। इसके लिए महुआ प्रसंस्करण को मूर्तरूप देने की तैयारी है। कटघोरा के जंगल में भारी मात्रा में साल, चार व महुआ पेड़ पाए जाते हैं। इन पेड़ों से मिलने वाले वनोपज को संग्रहित कर वनवासी बाजार व वन निगम समिति में बिक्री करते हैं। महुआ का वृहत मात्रा में लोग कच्ची शराब बनाने के लिए उपयोग करते हैं। इसके अलावा निजी तौर पर वनवासी महिलाएं घर में इसका लड्डू व भूनकर लाटा तैयार करती हैं। जिसे लोग चाव से खाते हैं। महुआ से अन्य कई खाद्य उत्पाद बनाने की नित नई संभावनाएं सामने आ रहीं है। मार्च से महुआ संग्रहण शुरू हो जाएगा। फूड ग्रेड महुआ संग्रहित कर लड्डू बनाने के लिए वन विभाग ने छह वन धन केंद्र का चयन किया है। इनमें वनधन केंद्र मानिकपुर, पसान, डोंगा नाला, मोरगा, गुरसियां और ईरफ शामिल हैं। केंद्रों के माध्यम से फूड ग्रेड महुआ संग्रहित कराया जाएगा। वन विभाग ने इस बार 500 क्विंटल महुआ खरीदी का लक्ष्य रखा है। जिला खनिज न्यास मद से इसकी खरीदी की जाएगी। प्रत्येक केंद्र से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों को लड़डू बनाने का दायित्व दिया जाएगा। महुआ लड्डू पोषण की दृष्टि से बेहद लाभकारी है। इसमें विटामिन सी के अलावा प्राकृतिक शर्करा, आयरन, कैल्शियम और ऊर्जा देने वाले तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। जानकार मानते हैं कि महुआ बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, कमजोरी दूर करने और शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करने में सहायक माना जाता है। पोषण विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह लेकर लड़डू के आकार व मात्रा तय की जानी चाहिए।

महिलाएं होंगी आत्मनिर्भर
इस योजना से न केवल बच्चों को पौष्टिक आहार मिलेगा, बल्कि महिला समूहों को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा। समूह की महिलाएं लड्डू को खुले बाजार में बिक्री कर सकेेंगी। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से इसे मिड डे मील के लिए खरीदी की जाएगी। उत्पाद तैयार करने में आने वाली लागत के आधार मूल्य तय किया जाएगा। लड़डू के अलावा महुआ से बनने वाली जैली, चॉकलेट सहित अन्य सामान तैयार करने के लिए स्व-सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उत्पाद बिक्री कर वे आत्म निर्भर बन सकें।

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