लकोरबा। नियमित प्राध्यापकों की कमी ने मेडिकल शिक्षा की लचर व्यवस्था को उजागर कर दिया है। मेडिकल कॉलेज में पीजी कक्षा संचालन के लिए तीन स्तर के प्राध्यापकों की नियुक्ति करने का प्रावधान है। इनमें प्राध्यापक के अलावा एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं। 22 आवश्यक पदों में केवल चार पद ही भरे हैं। इससे अध्यापन का अनुमान लगाया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के संचालन को चार साल बीत चुके है। लंबे अंतराल बाद भी पीजी क्लास के लिए प्रोफेसर के आवश्यक 96 पद में से 50 पद खाली हैं। प्राध्यापकों की पर्याप्त भर्ती नहीं होने की वजह से अध्ययनरत विद्यार्थियों को स्वाध्याय के दम पर ही पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर के 32 में 16 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 42 में 12 पद खाली हैं। शिक्षा 2025-26 में एमबीबीएस की प्रथम बैच निकलेगी। स्नातक के विद्यार्थियों को एमडी की पढ़ाई के लिए बाहर जाना न पड़े इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने एनएमसी से पांच विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए अनुमति मांगी थी। इनमें एनेस्थिसिया, मेडिसीन, गायनी, पेट्रियॉटिक और सर्जरी शामिल थे। जिसमें चार विषयों के लिए एनएमसी ने अनुमति दे दी है। पेट्रियाटिक के लिए प्राध्यापक पद खाली होने की वह से कॉलेज प्रबंधन को केवल चार विषय में पीजी कक्षा के लिए संतुष्ट होना पड़ा है। पीजी कक्षा के एडमिशन को नेशनल मेडिकल काउंसिल ने अनुमति दे दी है। एनेस्थिसिया, मेडिसीन, गायनी और सर्जरी में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वालों के लिए 13 सीटें निर्धारित की गई है। ऑल इंडिया रिजर्व कोटे के छह सीट के लिए एडमिशन शुरू हो गया है। वहीं राज्य कोटे की रिजर्व सीट में एडमिशन के लिए अभी भी इंतजार है। मेडिकल कॉलेज खुलने के साथ कई कोर्स शुरू होने थे, लेकिन पहले से ही जमीन सीमित होने से आइटी कॉलेज परिसर में डेंटल और नर्सिंग की पढ़ाई शुरू करना संभव नहीं हो सका है। नए भवन बनने के बाद ही छात्रों को इन विषयों में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
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