मौसमी बीमारी के मरीजों की बढ़ती जा रही संख्या, कभी गर्मी तो कभी सर्दी बिगाड़ रही सेहत
कोरबा। जिला अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से लगातार मौसमी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। दीपावली की साफ-सफाई व घरों में हो रही सफाई के कारण अस्थमा के मरीज भी सामने आए हैं। साथ ही एलर्जी, हाथ-पैर में दर्द के मरीजों की भीड़ ओपीडी में देखी जा सकती है। दिवाली सफाई के अलावा मौसम ने कभी गर्मी तो कभी सर्दी के कारण भी मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। दिवाली में घरों में साफ-सफाई व रंग रोगन के काम हो रहे हैं। इसी के कारण लोगों में एलर्जी की समस्या भी बढ़ रही है। इसमें महिलाओं व बच्चों की संख्या अधिक है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार 80 फीसदी एलर्जी के कुल मामलों में से 70 फीसदी से ज्यादा डस्ट एलर्जी के कारण होते हैं। ठंड की शुरूआत व दिवाली के आसपास यह समस्या हर दूसरे घर में लोगों को परेशान करती नजर आती हैं। ऐसे में यदि सावधानी ना रखी जाए तो यह व्यक्ति को दमा व सांस संबंधी गंभीर बीमारी की गिरफ्त में ला सकती है। शहर के जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे 20 से 25 मरीज पहुंच रहे हैं, जो घर व कार्य स्थल की साफ-सफाई के चलते बीमार पड़ गए। मानसून के दौरान सीलन व फफूंद बढ़ जाती हैं। जो दिवाली आने से पहले व ठंड की शुरूआत में वातावरण से नमी कम होने के कारण सूखने से दूर तक फैलने लगती है। ऐसे में सफाई के दौरान यह सब धूल के साथ मिलकर सांस लेते समय शरीर में पहुंच जाते हैं। जो एलर्जी को ट्रिगर करने का कार्य करती है। इसी दौरान यदि रंग-रोगन में उपयोग होने वाले रसायनों के साथ मिलकर सांस के साथ यह शरीर में पहुंचे तो यह दमा व सांस संबंधी गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है।
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