Monday, February 16, 2026

ये फुटपाथ हमारा है, ठेला गुमटी वालों ने कर लिया है कब्जा, अतिक्रमण की जद में शहर का फुटपाथ

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ये फुटपाथ हमारा है, ठेला गुमटी वालों ने कर लिया है कब्जा, अतिक्रमण की जद में शहर का फुटपाथ

कोरबा। शहर के फुटपाथ पर बेजा कब्जा की बाढ़ आ गई है। फुटपाथ पर दुकानें लग रही है। पैदल चलने के लिए लोगों को जगह नहीं मिल रही है। सडक़ किनारे गाडियां पार्किंग की जा रही है।जिसके कारण यातायात व्यवस्था तो बिगड़ ही रही है, शहर में किए गए करोड़ों के सौंदर्यीकरण के कार्य पर भी ग्रहण लग गया है। शहर के आईटीआई चौक से सीतामढ़ी तक फुटपाथ अतिक्रमण की जद में आ चुका है। जिम्मेदारों के द्वारा कार्यवाही नहीं करने के कारण इस तरह की स्थिति शहर में निर्मित हो चुकी है। सडक़ किनारे किए गए बेजाकब्जा हटाने की प्रमुख रूप से जिम्मेदारी नगर निगम की है। तोड़ूदस्ता और बेजाकब्जा हटाने के लिए पहले से ही अधिकारी नियुक्त हैं। फुटपाथ पर हो रहे कब्जे को लेकर सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने से न केवल शहर की यातायात व्यवस्था बिगड़ रही बल्कि सौंदर्यीकरण पर भी ग्रहण लग रहा है। व्यवस्था बनाने निगम ने करोड़ों रूपये का निर्माण कार्य करा लिया है पर इसे अमलीजामा पहनाने में असफल है। समय रहते कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण एक व्यवसायी के देखा देखी दूसरे भी सडक़ पर कब्जा करने लगे हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। घंटाघर के निकट पेट्रोलपंप के सामने फुटपाथ में दुकानें ही दुकानें लग रही है। मिनीमाता कालेज मार्ग, महाराणा प्रताप चौक, बुधवारी में भी फुटपाथ पर कब्जा हो चुका है। निगम ने आम लोगों के लिए फुटपाथ का निर्माण किया है, लेकिन व्यवसाइयों ने इसमें अपना समाना रखने और दुकान लगाने की जगह बना ली। ऐसे में पैदल चलने वालों का सडक़ पर चलना पड़ रहा । रही सही कसर को वाहन चालकों ने पार्किंग कर पूरी कर दी है। शहर में व्यवस्थित यातायात के लिए की गई सभी कवायदे धरी की धरी रह गई है। व्यसायिक दृष्टि शहर के व्यस्ततम मार्ग में बकायदा सीमा रेखा खींच कर फुटपाथ के लिए रास्ता तय किया गया है। राहगीर फुटपाथ के बजाय सडक़ों पर चलते देखे जा सकते हैंं। गुपचुप चाट, फल आदि सामान को ठेले में लेकर बिक्री करने वाले व्यवसाइयों के लिए चौपाटी का निर्माण स्मृति उद्यान के पीछे किया गया है। 1.45 करोड़ की लागत से निर्मित चौपाटी कोरोना काल के पहले केवल दो माह के लिए हुआ था। संक्रमण हटने के बाद व्यवसायी फिर से पुराने जगह में आ गए हैं। बताना होगा कि फुटपाथ निर्माण के बाद यातायात विभाग कार्रवाई करती है और उस वक्त व्यवसायी वहां से हट जाते हैं। दो-तीन दिन बाद फिर से कब्जा जमा लेते हैं। स्थाई व्यवस्था दुरूस्त करने में जिला प्रशासन नाकाम है।

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ओपन थियेटर में आयोजन, सडक़ में जाम
ओपन थियेटर में आए दिन खेल, सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक आयोजन होते रहते हैं। इस दौरान यहां चौपाटी सडक़ पर आ जाती है। मार्ग में पहले से ही फल दुकान लगाने वालों ने कब्जा कर रखा है। ऐसे मे गुपचुप चाट ठेला चलाने वालों की कतार स्मृति उद्यान के सामने लग जाती है। शाम के समय बाजार में खरीदी के लिए आने वाले लोगो की वजह से सडक़ में जाम लग जाता है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यहां यातायात पुलिस की भी तैनाती नहीं रहती। यहां पर कुछ दुकान संचालक ऐसे भी हैं जो चोरी ऊपर से सीना जोरी की तर्ज पर दुकान के पास खड़ी वाहनों में स्क्रैच लगा रहे हैं। कई मामले सिविल लाईन थाना तक पहुंच चुकी है।
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जिम्मेदारों को नहीं है परवाह
सडक़ किनारे से बेजाकब्जा हटाने की प्रमुख रूप से जिम्मेदारी नगर निगम के जोन अधिकारियों की है। तोड़ूदस्ता और बेजाकब्जा हटाने के लिए पहले से ही अधिकारी नियुक्त हैं। फुटपाथ पर हो रहे कब्जे को लेकर सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने से न केवल शहर की यातायात व्यवस्था बिगड़ रही बल्कि सौंदर्यीकरण पर भी ग्रहण लग रहा। व्यवस्था बनाने निगम ने करोड़ों रूपये का निर्माण कार्य करा लिया है पर इसे अमलीजामा पहनाने में असफल है। समय रहते कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण एक व्यवसायी के देखा देखी दूसरे भी सडक़ पर कब्जा करने लगे हैं।
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मवेशियों का शहर के सडक़ों पर कब्जा कायम
मवेशियों को सडक़ दुर्घटना से बचाने के लिए पूर्ववर्ती राज्य शासन ने रोका छेंका अभियान चलाया था। जिसका पालन निगम क्षेत्र में पूरी तरह से नहीं हुआ। अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है, लेकिन मवेशियों को सडक़ से हटाने कोई कार्रवाई नजर नहीं आई है। शहर के सभी प्रमुख मार्गों में मवेशियों जमावड़ा देखा जा सकता है। खासकर सुभाष चौक, महानदी कांप्लेक्स निहारिका, कोसाबाड़ी मार्ग में वाहनों की चपेट में आकर मवेशी दुर्घटना का शिकार होते हैं। वाहन चालकों के भी दुर्घटना के शिकार होने के मामले सामने आते रहते हैं। व्यवस्था सुधार को लेकर शहर के मवेशी पालकों का भी सहयोगात्म रूख नहीं है। जिसका खामियाजा राहगीरों और मवेशियों को भुगतना पड़ रहा है।

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