Thursday, February 26, 2026

राखड़ बांध से फसल हुई चौपट, किसानों को मुआवजा का इंतजार

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राखड़ बांध से फसल हुई चौपट, किसानों को मुआवजा का इंतजार

कोरबा। धनरास राखड़ बंद के कारण किसानों को फसल की क्षति हुई है। एनटीपीसी के अधिकारियों का जरुर ये दावा है कि जिन किसानों का नुकसान हुआ है उनको हर्जाना दिया जाएगा। इधर किसानों का पहले से ही ये आरोप रहा है कि पूर्व में इसी तरह की जो घटनाएं हुई उसका मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया है। ऊर्जाधानी कोरबा में पैदा होने वाली बिजली से राज्य और देश रौशन होता है, लेकिन इसकी कीमत कई बार यहां के किसानों को चुकानी पड़ती है। जिले में कोयला आधारित पावर प्लांट स्थापित हैं जिनकी संख्या एक दर्जन है। एनटीपीसी के 2600 मेगावाट की यूनिट भी कोरबा में मौजूद है। बिजली पैदा होने की प्रक्रिया में कोयला जलने के बाद बड़े पैमाने पर राख उत्सर्जित होता है। इस राख को राखड़ डैम में छोड़ जाता है। किसी भी पावर प्लांट प्रबंधन के लिए राख का यूटिलाइजेशन बड़ा सिरदर्द रहता है। एनटीपीसी पावर प्लांट, कोरबा का राखड़ बांध गांव धनरास में स्थापित है। गर्मी में यहां के किसान इस राखड़ बांध से उड़ने वाले राख से परेशान रहते हैं। बरसात में इसी राखड़ बांध का पानी उनके उनके खेतों को बर्बाद करता है। तीन दिन पहले भी ऐसा ही हुआ। जिले में हुई तेज बारिश के बाद एनटीपीसी का धनरास राखड़ बांध छलक उठा। ग्रामीणों का आरोप है कि राखड़ बांध का तटबंध टूट गया और राख युक्त दूषित पानी उनके खेतों में चला गया। जिससे बड़ी तादाद में खेत में लगा थरहा बर्बाद हुआ है। एनटीपीसी प्रबंधन की मानें तो भारी बरसात के बाद ज्यादा मात्रा में पानी राखड़ बांध में जमा हो गया था। ज्यादा क्षति न पहुंचे इसलिए निर्धारित मार्ग से पानी को निकाला गया। इसी दौरान कुछ राख वाला पानी किसानों के खेत में गया है। धनरास राखड़ तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित है। धनरास राखड़ तटबंध की ऊंचाई बढ़ाने हेतु अनुमति छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल से ली जा चुकी है। कार्य उस अनुमति और मानको के आधार पर ही किए जाते रहे हैं। राखड़ बांध की नियमित पेट्रोलिंग की जाती है। जिले में हुई भारी वर्षा के बावजूद तत्काल उचित कार्रवाई करके बड़ी क्षति को रोका गया है। अत्यधिक वर्षा से पैदा हुई आपातकाल की स्थिति में राख बांध को क्षति से बचाने के लिए पुनर्निर्धारित मार्ग से अधिकारियों की निगरानी में पानी को निकाला गया है। जिसका कुछ हिस्सा नीचे मौजूद ग्रामीणों के खेतों में भी गया है। घटना के समय भी राखड़ बांध में एनटीपीसी के सभी छ: अधिकारी मौजूद थे। किसानों को हुए नुकसान की भरपाई भी की जाएगी। जिसके लिए एनटीपीसी प्रतिबद्ध है।

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