Thursday, January 22, 2026

रायगढ़ जाने नहीं सीधी ट्रेन की सुविधा, चांपा में ट्रेन बदलने की मजबूरी

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कोरबा। कोरबा, चांपा, जांजगीर क्षेत्र के यात्रियों की अमृतसर से कोरबा तक सीधी यात्रा सुनिश्चित करने अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का विस्तार कोरबा तक करने के निर्णय पर दो साल बाद भी अमल नहीं हुआ है। जिससे अमृतसर से कोरबा तक के यात्रियों को सीधी ट्रेन की सुविधा कोरबा तक नहीं मिली है। अभी यह गाड़ी बिलासपुर तक ही आती है। कोरबा से रायगढ़ के बीच सीधी ट्रेन चलाई चलाने का निर्णय भी कागजों तक सीमित है, जिससे कोरबा के यात्रियों को बिना गाड़ी बदले रायगढ़ तक सीधी रेल सेवा प्राप्त नहीं हो रही है। अभी कोरबा से रायगढ़ जाने वाले यात्रियों को चांपा स्टेशन में गाड़ी बदलकर जाना पड़ता है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के मंडल रेल प्रबंधक ने 27 दिसंबर 2023 को अधिकारियों के साथ ट्रेनों के परिचालन को लेकर समीक्षा बैठक की थी। जिसमें यात्रियों की यात्रा को सुखद एवं सुगम बनाने की पहल करने की बाद कही गई थी। बैठक में लिए गए निर्णय अगर पूरा हो जाते तो वास्तविक में वह अभिनव पहल होती है। बैठक में 5 बिंदुओं पर निर्णय हुआ था। जिसमें 2 ऐसे निर्णय थे, जो पूरा होते तो कोरबा के लोगों की विकास को और रफ्तार मिल जाती है। परन्तु दुर्भाग्य ही है कि उस अहम निर्णय में अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस आज न तो कोरबा आ पायी और न ही कोरबा के लोगों को रायगढ़ जाने आने कोई सीधी ट्रेन मिल पाई है। जिसका खामियाजा दोनों दिशाओं के यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। कोरबा के लिए यह बड़ी विसगंति है कि 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक राजस्व देने के बाद भी आज तक न तो रायगढ़ रूट और न ही कटनी रूट में सीधी ट्रेन सेवा से कनेक्ट हो पाया है। रेलवे की एक मात्र मंशा है कि वह किसी भी दृष्टि से कोल डिस्पैच को प्रभावित नहीं करना चाहता है। कोविड-19 के बाद देश के पावर प्लांटों से कोयले कि डिमांड काफी बढ़ गई है। जहां पहले कोरबा से 24 घंटे में मात्र 34-35 रैक कोयला ही बाहर भेजा जाता था उसकी संख्या वर्तमान में 45 से 50 रैंक पहुंच गई है। इतना ही नहीं वित्त वर्ष में कई ऐसे अवसर रेलवे पैदा करता है जब कोल डिस्पैच आंकड़ा 60 से 65 रैक के बीच पहुंच जाता है। यह तब संभव होता है जब लगातार लांगहाल मालगाड़ी चलाकर कोयला भेजा जाता है।

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