Thursday, February 26, 2026

रोजाना टारगेट को भी हासिल करने में हाँफ रही खदानें, मेगा परियोजनाओं के लचर प्रदर्शन से बढ़ रही चिंताएं

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रोजाना टारगेट को भी हासिल करने में हाँफ रही खदानें, मेगा परियोजनाओं के लचर प्रदर्शन से बढ़ रही चिंताएं

कोरबा। एसईसीएल की मेगा परियोजनाओं के लचर प्रदर्शन ने कंपनी प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। सालाना लक्ष्य से पीछे चल रही यह परियोजनाएं रोजाना लक्ष्य को भी हासिल करने में नाकाम साबित हो रही है।एसईसीएल को वित्तीय वर्ष में 206 मिलियन टन कोयला उत्पादन और डिस्पैच का टारगेट मिला हुआ है। इस टारगेट को पूरा करने एसईसीएल को हर माह का लक्ष्य दिया जाता है। माह के लक्ष्य को पूरा करने खदानों का डेली टारगेट भी निर्धारित किया जाता है।एसईसीएल को रोजाना 5 लाख 90 हजार टन से अधिक कोयला रोजाना उत्पादन व 7 लाख 70 हजार टन से अधिक कोयला का उठाव करना है। इस लक्ष्य में से गेवरा एरिया को लगभग 2 लाख 34 हजार टन कोयला रोजाना उत्पादन करना है। वहीं 1 लाख 86 हजार टन कोयला का उठाव एरिया से होना है। इसके मुकाबले बुधवार को एरिया से 1 लाख 93 हजार के करीब उत्पादन व 1 लाख 77 हजार लगभग उठाव किया गया। इसी तरह दीपका एरिया को डेली 1 लाख 49 हजार टन के करीब उत्पादन व 1 लाख 18 हजार के करीब उठाव का लक्ष्य है। जिसके मुकाबले एरिया से लगभग 1 लाख 11 हजार टन उत्पादन व 1 लाख 7 हजार टन उठाव किया गया। गेवरा दीपका की स्थिति तो ठीक ही है, लेकिन कुसमुंडा एरिया ने अपने प्रदर्शन से अब तक कंपनी प्रबंधन की टेंशन बढ़ाई है। कुसमुंडा को रोजाना 1 लाख 94 हजार टन के करीब उत्पादन व 1 लाख 33 हजार टन के लगभग उठाव करना है। इस लक्ष्य के मुकाबले कुसमुंडा एरिया ने बुधवार को 95 हजार टन उत्पादन व 1 लाख 3 हजार टन के करीब उठाव पूरा किया। इस तरह कुसमुंडा एरिया रोजाना लक्ष्य से 1 लाख टन तक कम कोयला का उत्पादन कर रही है। यही वजह है कि जनवरी में 6 मिलियन टन के मुकाबले अब तक 2.92 मिलियन टन कोयला उत्पादन ही एरिया से हो सका है। वित्तीय वर्ष समाप्ति को अब लगभग ढाई माह शेष है। यह किसी भी कंपनी के लिए पिक अवर माना जाता है। इसी अवधि में उत्पादन की रफ्तार तेज होती है। दूसरी ओर एसईसीएल की मेगा परियोजनाएं डेली टारगेट को भी पूरा करने मेें नाकाम साबित हो रही है। एसईसीएल कुसमुंडा एरिया के सामने लंबे समय से खनन के लिए जमीन की समस्या बनी हुई है। नौकरी, मुआवजा व बसाहट के प्रकरण लंबित हैं। जिसे लेकर समय-समय पर भूविस्थापित और संगठनों द्वारा आंदोलन भी किया जाता है। तमाम तरह की चुनौतियों के बीच एसईसीएल कुसमुंडा एरिया ने अब तक कंपनी प्रबंधन को निराश ही किया है।

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