वाहन चालकों पर शिकंजा, मॉडिफाइड साइलेंसर बेचने वालों को खुली छूट, शहर के आटोपार्ट्स दुकानों में आसानी से मिल जा रहे तेज आवाज वाले साइलेंसर

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वाहन चालकों पर शिकंजा, मॉडिफाइड साइलेंसर बेचने वालों को खुली छूट, शहर के आटोपार्ट्स दुकानों में आसानी से मिल जा रहे तेज आवाज वाले साइलेंसर

कोरबा। शहर में ट्रैफिक पुलिस जहां एक ओर मॉडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर शिकंजा कस रही है, वहीं इन साइलेंसरों को बेचने वाले ऑटोपार्ट्स संचालकों पर कभी कभार कार्रवाई की गई है। नतीजतन, शोरगुल बढ़ता जा रहा है और सडक़ दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है। मॉडिफाइड साइलेंसर से निकलने वाली झन्नाटेदार आवाजें न केवल ध्वनि प्रदूषण का कारण बन रही हैं, बल्कि ये वाहन चालकों के लिए ध्यान भटकाने वाली भी साबित हो रही हैं। शहर लगभग सभी इलाकों में इन वाहनों की धमक रोज सुनाई देती है। खासकर युवाओं के बीच यह एक ट्रेंड बन गया है, जो दुर्घटनाओं का सबब बना हुआ है। यातायात पुलिस द्वारा मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों को जब्त कर चालकों पर जुर्माना तो लगाया जा रहा है, पर जो दुकानदार ये गैरकानूनी साइलेंसर बेच रहे हैं, उन पर कोई कार्रवाई न होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है। यह विडंबना ही है कि जिस स्रोत से यह समस्या उपज रही है, वहीं से निपटने की कोई तैयारी नहीं दिख रही।9मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ऐसे साइलेंसर का निर्माण, बिक्री और प्रयोग तीनों प्रतिबंधित हैं, फिर भी शोरूमों और एक्सेसरी दुकानों पर यह आसानी से उपलब्ध हैं। प्रशासन यदि इस पर निगरानी रखे और बिक्री पर लगाम लगाए, तो आधी समस्या स्वत: समाप्त हो सकती है।

मानसिक तनाव और दुर्घटनाओं का खतरा

डॉक्टरों के अनुसार लगातार तेज आवाज सुनने से लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव, नींद की कमी और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती है। वहीं ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि ये आवाजें सडक़ पर चलने वालों का ध्यान भटकाती हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

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