Monday, February 23, 2026

विद्युत खंभों ने रोका सड़क निर्माण का कार्य, 4 साल बाद भी मार्ग से नहीं हटाए गए विद्युत पोल, बरमपुर चौक और इमली छापर चौक से कुचेना मोड तक कार्य है बंद

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विद्युत खंभों ने रोका सड़क निर्माण का कार्य, 4 साल बाद भी मार्ग से नहीं हटाए गए विद्युत पोल, बरमपुर चौक और इमली छापर चौक से कुचेना मोड तक कार्य है बंद

 

कोरबा। कोरबा-कुसमुंडा मार्ग चलने के लिए तो फोर लेन मार्ग बन रहा है। बीते कई वर्षों से इस मार्ग पर चल रहें हैं वे परेशानी का सामना करने मजबूर हैं।निर्माणाधीन फोरलेन मार्ग पूर्ण रूप से बनते बनते रह गया है,जिसमें कहीं रोड ठेकेदार की वजह से देरी हुई तो कहीं कुंभकरणीय नींद में सोए प्रशासन की वजह से देरी हो रही हैं। शिवमन्दिर चौक विकास नगर से बरमपुर मोड और सर्वमंगला चौक तक सडक़ बन चुकी है,और बन कर उखड़ भी रही है। बताया जा रहा है कि बरमपुर नहर, मोड के पास और इमली छापर चौक से कुचेना मोड तक सडक़ ठेकेदार को काम ही नहीं करने दिया गया। इन दोनों ही स्थानों पर सीएसईबी के विद्युत खंभों को हटाने की जिम्मेदारी प्रशासन की थी, जो चार साल होने को है, नही हटाए गए। जिस वजह से यहां काम आगे नहीं बढ़ पाया। इमली छापर चौक में जहां सीसी रोड बनी उसमें पार्किंग किया जा रहा है। इधर ओवर ब्रिज भी अधूरा है। यहां गड्ढे खोद कर छोड़ दिए गए हैं। लक्ष्मण नाला पर बनने वाला पुल अधर में लटका हुआ है। इन सबके बीच कुचेना मोड से इमली छापर चौक से गेवरा रोड रेल्वे स्टेशन तक पुरानी सडक़ लगभग पूरी तरह से उखड़ चुकी है। वार्ड 57 की पार्षद सुरती कुलदीप, वार्ड 58 पार्षद बसंत चंद्रा सहित क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों ने जब सडक़ पर उतर कर आंदोलन की बात कही, तब बरमपुर मोड का काम शुरू हुआ। काफी हद तक काम हुआ भी पर नहर पुल और सीएसईबी के बिजली के खंभों की वजह से यहां काम रुक गया है। जिससे विशालकाय गढ्डों के बीच लोग आवाजाही के लिए मजबूर हैं। दूसरी तरफ इमली छापर में भी स्थिति जस के तस है। यहां जबकि गढ्ढों को भरने और आम लोगों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जिम्मेदारी निर्माणधीन फोर लेन ठेकेदार की है तो प्रशासन ने तात्कालिक राहत के लिए एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन को सडक़ के गड्ढे भरने को कह दिया। जिस पर एसईसीएल कुसमुंडा के सिविल विभाग ने कुचनेा मोड से इमली छापर तक की सडक़ के गढ्डों को भरने लगभग 18 लाख रुपए का काम निकाला, जो वर्तमान में धरातल पर चल रहा है,लेकिन यह भी नाकाफी नजर आ रहा है। गढ्ढे जस के तस हैं। कई स्थानों पर गढ्ढे भरे गए पर दो दिन बाद वे भी फिर से गढ्ढे हो जा रहे हैं। वजह है लगातार भारी एवम हल्के वाहनों की आवाजाही। असल में यहां इस मार्ग को पूर्ण रूप से स्थाई तौर पर बनाने से राहत मिल पाएगी। अन्यथा लाखों के टेंडर निकलते रहेंगे और गढ्ढे भरे ना भरे ठेकेदार और अधिकारियों के जेब भरते रहेंगे।

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