शादी-विवाह के लिए शहर के मैरिज गार्डन, होटल हो रहे बुक, 23 से फिर गूंजेगी शहनाई, बैंड बाजा बारात की होगी रौनक

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शादी-विवाह के लिए शहर के मैरिज गार्डन, होटल हो रहे बुक, 23 से फिर गूंजेगी शहनाई, बैंड बाजा बारात की होगी रौनक

कोरबा। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी एकादशी) पर 23 नवंबर से शादी-विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। इस दिन स्वयंसिद्ध अबूझ मुहूर्त होने के कारण करीब पांच माह बाद फिर से शहर समेत जिले में शहनाइयां गूंजेंगी तथा सडक़ों पर बैंड-बाजा और बारात की रौनक दिखाई देगी।शादी-विवाह के लिए शहर के मैरिज गार्डन, होटल अभी बुक हो चुके हैं। इस दिन घरों में भगवान शालिग्राम और तुलसी विवाह का आयोजन होगा। गन्ने से मंडप सजाया जाएगा। साथ ही शंख और घंटे-घडिय़ाल की ध्वनि के बीच भगवान विष्णु को जगाया जाएगा।ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 29 जून को देव शयनी एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्यों पर रोक लगी थी। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी पर 22 नवम्बर तक देवशयन दोष है। इसके बाद एकादशी पर 23 नवम्बर को देवप्रबोधिनी एकादशी (देवउठनी) पर विवाह आदि मांगलिक कार्य प्रारम्भ हो जाएंगे। 16 दिसंबर को धनु मलमास शुरू हो जाएगा, जो 14 जनवरी तक रहेगा। इसके बाद फिर से शादी-ब्याह सहित अन्य मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
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तुलसी विवाह का महत्व
तुलसी को विष्णु प्रिया भी कहा जाता है। देवउठनी एकादशी पर देवता जब जागते हैं, तो सबसे पहली प्रार्थना तुलसी की ही सुनते हैं। तुलसी विवाह का अर्थ है कि तुलसी के माध्यम से भगवान का आह्वान करना। शास्त्रों में भी उल्लेख है कि जिन दंपत्तियों के कन्या नहीं होती, वे एक बार तुलसी का विवाह कर कन्यादान करें।

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