सफाई ठेकेदारों की बढ़ी मनमानी, लगा कचरे का ढेर, एक ही जोन में एक ही ठेकेदार को काम मिलने से व्यवस्था बेपटरी
कोरबा। सफाई का ठेका जोनवार होने से ठेकेदारों की मनमानी और बढ़ गई है। इससे पहले वार्डवार ठेका होने से निगरानी करने में आसानी होती थी। अब एक ही जोन में एक ही ठेकेदार को काम मिलने से व्यवस्था बेपटरी होने लगी है। जोनवार होने से निगरानी भी सही तरीके से नहीं हो पा रही है। इससे पहले तक वार्डवार सफाई का ठेका होता था, लेकिन 2022 से यह जोनवार कर दिया गया है। जोनवार होने से एक ही ठेकेदार को पांच से छह वार्डों का ठेका मिल गया है। किस जोन में कितने कर्मी काम कर रहे हैं, कितने घंटे काम कर रहे हैं। इसका अब मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है। पहले जब निगम के अधिकारी मॉनिटरिंग करने निकलते थे तब एक ही वार्ड में कर्मियों की गिनती और काम देखकर मूल्यांकन हो जाता था, लेकिन अब इसके लिए पूरे जोन में घुमना पड़ता है। इस वजह से निगरानी व्यवस्था कमजोर हो गई है।हर वार्ड में कितने श्रमिक होंगे और कितने संसाधन होंगे। यह भी निगम ने निर्धारित कर दिया है। हर वार्ड की भौगोलिक दृष्टिकोण के हिसाब से श्रमिक तय किए जा चुके हैं। शर्त के मुताबिक श्रमिकों से किन वार्डों में काम लिया जाएगा। इसकी भी सूची पहले ही देनी होती है।मौके पर अगर दूसरे वार्ड का श्रमिक का दूसरे वार्ड में काम करते दिखे तो उस पर कार्रवाई करने का प्रावधान है, लेकिन इतने महीने में कहीं भी इस तरह की खामियां निगम ने नहीं पकड़ी है।निगम क्षेत्र के कोरबा व कोसाबाड़ी जोन में अधिक वार्ड होने की वजह से यहां दो-दो ठेकेदार निर्धारित किए गए हैं। शेष जोन में वार्ड कम होने की वजह से एक-एक ठेकेदार को ही काम दिया गया है। सबसे अधिक बालको और दर्री जोन के वार्ड हैं। यहां की भौगोलिक दृष्टिकोण से एक-एक टेंडर ही किया जा रहा है। हालांकि इन सबमें कोसाबाड़ी व टीपीनगर क्षेत्र में काम संतोषजनक है, सबसे अधिक पुराने शहर, बालको व दर्री में समस्या है।
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बरबसपुर की बजाए एसएलआरएम सेंटर मेें ही कचरा डंप
जब से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन प्रांरभ हुआ है तब से ठेकेदारों का काम कम हो गया है। पहले की अपेक्षा अब गलियों में कचरा कम निकलता है। बरबसपुर की बजाए एसएलआरएम सेंटर मेें ही कचरा डंप किया जा रहा है। इस वजह से निगम का पूरा फोकस अब डोर टू डोर कलेक्शन को बढ़ाने पर है।हिसाब से हर वार्ड में पांच ई रिक्शा और एक ट्रैक्टर होना चाहिए। ताकि ई रिक्शा से छोटी गलियों में घुसकर कचरे का उठाव किया जा सके फिर ट्रैक्टर के माध्यम से डंपिंग तक भेजा जा सके, लेकिन किसी भी वार्ड में ई रिक्शा नहीं दिखते। संसाधनों की कमी साफ तौर पर देखी जा सकती है।
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इन वार्डों में हैें अधिक अमला
जिन वार्डों में सबसे अधिक श्रमिक सफाई कार्यरत हैं उनमें वार्ड क्रमांक 11 में 20, वार्ड क्रमांक 31 में 18, वार्ड क्रमांक 32 में 14, वार्ड क्रमांक 35 में 14 श्रमिक हैं। अधिकांश वार्डों में 10-10 श्रमिकों को रखा गया है। तो वहीं न्यूनतम आठ श्रमिक रखे गए हैं।
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