Thursday, February 5, 2026

सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर के इंतजार में तीन नई बसें, किराए के बस के भरोसे चल रही मेडिकल कॉलेज के छात्रों की व्यवस्था

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कोरबा। मेडिकल कॉलेज के छात्रों के आवाजाही के लिए एसईसीएल गेवरा क्षेत्र की ओर से छह महीने पहले दी गई तीन नई बसें सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर के इंतजार में अब तक सड़क पर नहीं उतरी हैं। यहां व्यवस्था किराए की बस के भरोसे चल रही है। कोरबा मेडिकल कॉलेज का खुद का कैंपस बन रहा है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज का संचालन आईटी कॉलेज परिसर के बिल्डिंग से हो रहा है। अस्पताल के संचालन के लिए जिला अस्पताल को संबद्ध किया गया है। आईटी कॉलेज परिसर में स्थित गर्ल्स व बॉयज हॉस्टल का संचालन भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से छात्रों के लिए किया जा रहा है। कॉलेज में चार सत्र का संचालन होने और हॉस्टल की क्षमता कम होने से परिसर से दूर भी हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। इसमें एक सुभाष चौक के पास वर्किंग वुमेन हॉस्टल व गवर्नमेंट कॉलेज मैदान हॉस्टल है, जहां छात्राओं को ठहराया है। छात्राओं को कॉलेज से हॉस्टल तक आवाजाही के साथ ही सीनियर छात्रों को क्लीनिकल ट्रायल के लिए कॉलेज परिसर के हॉस्टल से अस्पताल तक लाना और ले जाना पड़ता है। इसके लिए अब तक किराए की बस का उपयोग किया जा रहा है। इसे देखते हुए एसईसीएल गेवरा क्षेत्र ने सीएसआर मद से तीन नई बसें दी हैं। छह महीने बाद भी बसों को सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला है। वर्तमान में आईटी कॉलेज परिसर में संचालित मेडिकल कॉलेज से सीनियर बैच के 125 छात्रों को क्लीनिकल ट्रायल के लिए अस्पताल पहुंचाया जाता है। वहीं प्रथम व द्वितीय सत्र के छात्राओं को बाहर के हॉस्टल से कॉलेज पहुंचाया जाता है। बाद में सभी छात्रों को वापस छोड़ा जाता है। किराए में चल रही बस कई फेरा लगाती है। इस चक्कर में कॉलेज प्रबंधन पर किराए का भार पड़ रहा है।

नई बसों के संचालन से स्टूडेंट्स को मिलेगी राहत
नई बसों का संचालन शुरू होने से छात्रों को राहत मिलेगी। छात्र पढ़ाई व क्लीनिकल ट्रायल के लिए समय पर पहुंच सकेंगे। इंतजार के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। वहीं प्रबंधन को किराया भी नहीं देना पड़ेगा। एजुकेशनल टूर में भी सभी छात्र अलग-अलग बस में सवार होकर एक साथ एक जगह पहुंच सकेंगे।

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