Saturday, January 24, 2026

साल 2025 में बिजली, कोयला और एल्यूमिनियम उत्पादन में बने रिकॉर्ड, कोरबा में स्थापित उद्योगों और खदानों ने बनाई नई पहचान

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कोरबा। साल 2025 में कोरबा में स्थापित उद्योगों ने नई पहचान बनाई। बिजली के लिए जो कीर्तिमान पहले थे, इस वर्ष नए आयाम स्थापित किये। प्रदेश के सबसे बड़े सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट की नींव रखी गई तो कोयले का उत्पादन भी लगातार बढ़ा है। कोसा के लिए कोरबा का नाम पहले ही प्रख्यात था। यहां बेहतरीन क्वॉलिटी का कोसा मिलता है। इस वर्ष कोसा के उत्पादन में नए कीर्तिमान बने। छत्तीसगढ़ देश का दूसरा सबसे बड़ा कोसा उत्पादक राज्य बना, जिसमें कोरबा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। कोयला, बिजली, एल्युमिनियम और कोसा के क्षेत्र में कोरबा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

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कोरबा के कोयले से पूरा देश हो रहा रोशन
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के दौरान अब से 25 वर्ष पहले एसईसीएल के कोयला खदानों से 60 मिलियन टन कोयला निकलता था। इसमें से कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की खदानों से ही लगभग 40 मिलियन टन कोयले का उत्खनन होता था। अब वर्तमान पपरिवेश में कोरबा क्षेत्र, कुसमुंडा, दीपका और गेवरा की खदानों की उत्पादन क्षमता बढ़कर 160 मिलियन टन से ज्यादा हो चुकी है। कोरबा के खदानों से निकलने वाले कोयले से ही देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं। गेवरा खदान आज दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कोयला खदान बन चुकी है। कोल इंडिया लिमिटेड को देश में कुल उत्पादित कोयले का लगभग 20 फीसदी कोयला अकेले कोरबा जिले से प्राप्त हो रहा है।
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8 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन
कोरबा में सरकारी और निजी क्षेत्र के पावर प्लांट के जरिये जिले की दुनिया में एक विशिष्ट पहचान है। कोरबा में राज्य पावर कंपनी के अलावा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सभी पावर प्लांट से लगभग 8 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जब छत्तीसगढ़ का गठन हुआ था तब राज्य बिजली कंपनी के प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 1780 मेगावाट थी। अब यह 2840 मेगावाट हो चुकी है। जिले के सबसे पुराने 440 मेगावाट सयंत्र के बंद होने के बाद प्रदेश की बिजली आवश्यकता और बढ़ चुकी है। इसे देखते हुए एचटीपीएस दर्री प्लांट परिसर में ही 1320 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट की नींव रखी गई है। 2025 में इस प्लांट के निर्माण की प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ी है।इस प्लांट के बनने से पावर कंपनी की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ जाएगी।
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बालको के स्मेल्टर का काम बढ़ा और आगे
भारत में मुख्य एल्युमीनियम उत्पादक कंपनियां हिंडाल्को, वेदांता और नाल्को हैं, जो ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से बॉक्साइट खनन से लेकर एल्युमीनियम उत्पादन तक का कार्य करती हैं। भारत में सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक वेदांता एल्युमीनियम है, जो भारत के कुल उत्पादन का आधे से ज़्यादा हिस्सा (वित्त वर्ष 2024 में 2.37 मिलियन टन) बनाता है। वेदांता समूह का बालको अल्युमिनियम उत्पादन संयंत्र कोरबा जिले में ही स्थापित है. 2022 में 5.7 लाख टीपीए से 10 लाख टीपीए तक की क्षमता विस्तार की नींव रखी गई थी। 2025 में इसके कार्य में और विस्तार हुआ है। बालको द्वारा कुल 10000 करोड़ रुपए का इन्वेस्ट किया जा रहा है। जिसका काम आगे बढ़ा है, इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। एल्युमिनियम उत्पादन के मामले में कोरबा में स्थापित बालको ने विश्व स्तर पर में पहचान बनाई है। हालांकि बालको को लेकर कई विवाद भी जुड़े रहते हैं। जनता प्रतिनिधि और एक्टिविस्ट लोगों ने शिकायत भी कर रखी है।
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कोसा उत्पादक में कोरबा की विशिष्ट पहचान
रेशम उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़, झारखंड के बाद देश में दूसरा स्थान है। कोरबा जिले में रेशम गतिविधियों में पांच विकासखंडों के 49 पालित टसर केंद्रों में रेशम उत्पादन किया जा रहा है। टसर ककून का उत्पादन वर्ष 2000 में 67.1 करोड़ पीस से बढ़कर 2024-25 में 108.56 करोड़ पीस हो गया है। वर्तमान वर्ष 2025-26 में अब तक 50 करोड़ पीस टसर का उत्पादन किया जा चुका है। इस वर्ष का लक्ष्य पिछले वर्ष से भी ज्यादा है। विभाग के अनुसार इस वर्ष बड़ा हुआ लक्ष्य आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। कोसा उत्पादन के मामले में इस वर्ष कोरबा की एक विशिष्ट पहचान बनी है।

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