Monday, February 16, 2026

सिस्टम के दंश ने ले ली सर्पदंश पीड़ित बालिका की जान, बरसात के मौसम में गांव की खराब सड़क भी मौत की जिम्मेदार

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सिस्टम के दंश ने ले ली सर्पदंश पीड़ित बालिका की जान, बरसात के मौसम में गांव की खराब सड़क भी मौत की जिम्मेदार

कोरबा। जिले में सर्पदंश से 6 साल के बच्ची की मौत हो गई है। यह मौत केवल सांप के जहर से नहीं हुई है। इस बेटी की जान जाने के पीछे बरसात के मौसम में गांव की खराब सड़क भी जिम्मेदार है। गांव मुढुनारा के निवासी देवकरण पांडे ने बताया कि घटना रात के लगभग 2 बजे की है। बच्ची घर में सोई थी। रात को टॉयलेट जाने के लिए उसने अपने पिता को कहा। रात में घर में बिजली नहीं थी अंधेरा था। अंधेरे में ही उसे करैत सांप ने डस लिया। इसके बाद एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस को आने में एक घंटा और बर्बाद हो सकता था, ये सोचकर उन्होंने खुद गाड़ी किराया किया और बच्ची को अस्पताल ले जाने के लिए निकले। गांव मुढुनारा की दूरी जिला अस्पताल से सिर्फ 12 किलोमीटर है, लेकिन रोड ठीक नहीं है। बारिश के कारण बुंदेली नाले में पानी 3 से 4 फीट ऊपर बह रहा था। इसलिए उन्हें कोरकोमा की ओर से घूमकर आना पड़ा। जिसकी दूरी गांव से 27 किलोमीटर है। इन सबमे में उन्हें 1 घंटे की देरी हो गई। अगर गांव में पुल होता, सड़क अच्छी होती, तो हम 1 घंटा पहले यहां आ जाते और ऐसे में बच्ची की जान बच सकती थी। चिकित्सकों ने बताया कि सर्पदंश के बाद बच्ची एकदम मरणासन्न स्थिति में अस्पताल पहुंची थी। जिसका इलाज शुरू किया गया, इसके कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई। सर्पदंश के मामलों में मरीज को जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचा दिया जाए उतना ही उसकी जान बचाने की संभावना ज्यादा रहती है। सांप कितना जहरीला है और किस प्रजाति का है, यह भी महत्वपूर्ण है, सांप ने शरीर के अंदर कितना जहर छोड़ा है, इससे मरीज की स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शासन और प्रशासन ग्रामीण अंचल में सुविधाएं पहुंचाने के लाख दावे कर ले। धरातल का हाल ठीक इसके विपरीत होता है। जब किसी गांव में 6 साल की बच्ची की जान उदासीन प्रशासनिक व्यवस्था के कारण चली जाती है, तब सरकारी दावों की पोल खुल जाती है। मौजूदा मामले में देवकरण पांडे कहते हैं कि गांव का जो पहुंच मार्ग है। यहां कम से कम सड़क और पुल का निर्माण किया जाना चाहिए। ताकि किसी और की मौत इस तरह से ना हो। उनका कहना है कि ग्रामीण कई बार मांग कर चुके हैं कि गांव में पुल बनाया जाए। हर साल गांव में बरसात के मौसम में यही स्थिति बन जाती है, लेकिन आज तक निर्माण नहीं हुआ है। रोड से पानी 3 से 4 फीट ऊपर बह रहा था। यहां से आना संभव ही नहीं हो पाता।

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