Monday, February 16, 2026

हाथी प्रभावित केंद्रों में धान जाम, बढ़ी टेंशन, जान जोखिम में डालकर करनी पड़ रही धान की रखवाली

Must Read

कोरबा। खेतों में धान कटाई के बाद हाथियों का विचरण रिहायशी क्षेत्र में बढ़ गया है। धान खरीदी समाप्त होने के दस दिन से अधिक समय बीत चुके हैं। बावजूद इसके धान उठाव में प्रगति नहीं है। जिले में कुल 27.47 लाख क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। जिसमें 11 लाख क्विंटल धान अभी भी उपार्जन केन्द्र में जाम हैं। खास तो यह है कि ढाई लाख क्विंटल धान जिन उपार्जन केन्द्रों में रखे गए हैं। उनमें 11 केन्द्र हाथी प्रभावित क्षेत्र में शामिल हैं। उपार्जन केन्द्रों से धान उठाव के लिए डीओ कटवाने मिलर्स में होड़ मची हुई है। कलेक्टर ने पहले ही हाथी प्रभावित क्षेत्रों से धान उठाव को वरीयता देने की बात कही थी। इसका पालन नहीं होने की वजह से फड़ प्रभारियों को जान जोखिम में डाल धान की रखवाली करनी पड़ रही है। ग्रामीणों में भी भय का माहौल है। पसान, जटगा, कुदमुरा, चचिया, गुरमा, मोरगा, पिपिरया, केरवाद्वारी, बरपाली, लेमरू, श्यांग आदि ऐसे केंद्र है, जहां धान उठाव नहीं होने की वजह हाथी के आ धमकाने की आशंका बनी हुई है। इन दिनों कटघोरा वन मंडल में हाथियों का दल विचरण कर रहा है। हाथियों के दल ने बुधवार को जटगा वन परिक्षेत्र के धोबीबारी में जमकर उत्पात मचाया था। हाथियों ने दस मकानों को ध्वस्त कर दिया, जबकि बकरी व दुधारू गाय की जान ले ली। हाथियों का दल कभी भी धान उपार्जन केन्द्रों की ओर रूख कर सकता है। धान रखने के लिए निर्मित चबुतरे व गोदाम में खुले में धान रखा गया है। नियमानुसार खरीदी के बाद उपार्जन केन्द्रों में धान खराब होने पर नोडल व फड़ प्रभारी जिम्मेदार होंगे। इस बार धान बिक्री के लिए 52 हजार 556 किसानों ने पंजीयन कराया। जिसमें 42 हजार से अधिक किसानों ने धान बेचा। खरीदी समापन के दो दिन बाद अतिरिक्त समय बढ़ाया गया था। बीते वर्ष 65 उपार्जन केन्द्रों में 29 लाख धान की खरीदी हुई थी। बीते वर्ष की तुलना में दो लाख क्विंटल धान खरीदी कम हुई है।

Loading

Latest News

अदानी पावर प्लांट को जमीन नहीं देना चाहते ढनढनी के ग्रामीण, 27 फरवरी को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले सामने आया ग्रामीणों का विरोध

कोरबा। लैंको पावर प्लांट का अदानी कंपनी ने अधिग्रहण किया है। इसके बाद से संयंत्र विस्तार की कवायद शुरू...

More Articles Like This