कोरबा। दीपका खदान में ब्लास्टिंग से पत्थर छिटकने पर हुए ग्रामीण की मौत के बाद सात घंटे आंदोलन चला। एसईसीएल प्रबंधन ने 10 लाख रुपये मुआवजा राशि प्रदान करने एवं पुत्र को ठेका कंपनी में नौकरी देने का आश्वासन दिया गया, तब आंदोलन समाप्त हुआ।
एसईसीएल की मेगा परियोजना दीपका खदान के सुआभोड़ी फेस में बुधवार को दोपहर तेज ब्लास्टिंग की गई। इस दौरान हरदीबाजार- रेंकी मार्ग में घर जा रहे एक ग्रामीण लखनलाल पटेल के सिर पर ब्लास्टिंग से छिटक कर एक पत्थर का टुकड़ा जा लगा। गंभीर रुप से चोट लगने पर लखनलाल की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया।अस्पताल से शव को वापस घटनास्थल पर लाकर ग्रामीण – धरने में बैठ गए। सूचना मिलने पर पाली एसडीएम रोहित कुमार, तहसीलदार अभिजीत, थाना प्रभारी निरीक्षक प्रमोद डडसेना तथा थाना प्रभारी कुसमुंडा मृत्युंजय पांडेय घटनास्थल पहुंचे। अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया। आंदोलनकारियों को समझाइश दी गई, पर आंदोलनकारियों ने परिवार के सदस्य को नौकरी एवं एक करोड़ मुआवजा की मांग की। रात 11 बजे तक वार्ता का दौर जारी रहा। बाद में 10 लाख रुपये मुआवजा मृतक के स्वजन को प्रदान किए जाने के साथ ही एवं पुत्र को ठेका कंपनी कलिंगा में नौकरी देने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ। पुलिस ने रात में वैधानिक कार्रवाई के बाद शव नेहरू शताब्दी चिकित्सालय के मर्चुरी में रखवा दिया। गुरूवार की सुबह वैधानिक कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम करा स्वजन को शव सौंप दिया गया।
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डीडीएमएस की टीम ने शुरू की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही डिप्टी डायरेक्टर माइंस आफ सेफ्टी (डीडीएमएस) की पांच सदस्यीय टीम
दीपका खदान पहुंची। टीम ने घटनास्थल एवं ब्लास्टिंग क्षेत्र का निरीक्षण करने के साथ ही जांच शुरू कर दी। ब्लास्टिंग के दौरान उपस्थित कर्मियों एवं अधिकारियों से
पूछताछ कर बयान लिए जा रहे हैं। टीम अपनी रिपोर्ट मुख्यालय में सौंपेगी। बताया जा रहा है कि घटना में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आई है और संभवत: कुछ कर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है।
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