Wednesday, February 25, 2026

12 सूत्रीय मांगों को लेकर खदानों में हल्ला बोल, भू विस्थापितों ने एक साथ कराया खदान बंद

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12 सूत्रीय मांगों को लेकर खदानों में हल्ला बोल, भू विस्थापितों ने एक साथ कराया खदान बंद

कोरबा। नौकरी, मुआवजा, विस्थापन सहित 12 सूत्रीय मांगों को लेकर खदानों में ग्रामीणों ने हल्ला बोल आंदोलन शुरू कर दिया है। लगभग सभी खदानों में काम बंद आंदोलन कर ग्रामीणों ने हुंकार भरी है। ग्रामीणों के वृहद आंदोलन से एसईसीएल प्रबंधन सख्ते में आ गया है।
संभवत: एसईसीएल के विरुद्ध आंदोलनों में ऐसा पहली बार हुआ है जब भू विस्थापितों के द्वारा पहली बार सारे खदानों में एक साथ खदान बंद करने का आंदोलन किया गया।एसईसीएल कुसमुंडा के सभी आउटसोर्सिंग कम्पनी के कर्मचारी, ठेका कामगारों ने आंदोलन के समर्थन में अपने ड्यूटी का बहिष्कार कर गाडिय़ों को खड़ा कर दिया।बुधवार को एसईसीएल बंद के आव्हान पर कोयला खदानों में कोयला उत्पादन, मिट्टी उत्खनन और परिवहन कार्य में लगी गाडिय़ों को रोककर बंद करा दिया गया है।कुसमुंडा क्षेत्र में सुबह 6 बजे से तो दीपका गेवरा क्षेत्र की खदानों में 8 बजे से आंदोलन शुरू हो गया था।कुसमुंडा क्षेत्र में पाली, पडनिया, रिसदी, जटराज, खोडरी, गेवरा बस्ती सहित 7 से ज्यादा गांव के लोग इक_ा हुए। जो एसईसीएल महाप्रबंधक का पुतला फुकेंगे रैली निकालने की तैयारी की जा रही है।भिलाई बाजार के मुहाने पर कामबंद कराया गया है। गेवरा खदान के नराई बोध रलिया आमगांव फेस को बंद करा दिया गया है।कोरबा क्षेत्र के सराईपाली परियोजना में सुबह से ही उत्पादन और परिवहन कार्य को रोककर धरना दिया जा रहा था। दीपका क्षेत्र में आमगांव दर्रा खांचा मलगांव और सुवाभोंडी फेस को खदान को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कहा कि एसईसीएल मुख्यालय में एसईसीएल के 7 क्षेत्रों के प्रभावितों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और एक साथ एक ही दिन आंदोलन की नोटिस जारी कर अपनी एकता का परिचय दिया है। हड़ताल से मिट्टी ,कोयला और परिवहन कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो गई है और इस आंदोलन से ही कम्पनी स्तर पर पुनर्वास नीति में संशोधन का रास्ता निकल कर आएगा । उन्होंने 2021 में हुए आंदोलन और उसके बाद 2022 में संशोधन का जिक्र करते हुए बताया कि पुराने लंबित रोजगार,मुआवजा में बढ़ोतरी, भूविस्थापित टेंडर , जैसी महत्वपूर्ण निर्णय आने से किसानो को लाभ हुआ था । आवेदन करते करते थक चुके हैं ।बिना आंदोलन के बहरी प्रबन्धन को सुनाई नही देती इसलिए यह आंदोलन जरूरी है।

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