Friday, February 13, 2026

17 जून को मनाई जाएगी निर्जला एकादशी

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17 जून को मनाई जाएगी निर्जला एकादशी

कोरबा। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत महत्वपूर्ण स्थान है। साल में 24 एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है, तब 26 एकादशी पड़ती है। ज्येष्ठ मास की पहली एकादशी 2 जून को पड़ी थी, जो अचला एकादशी के रूप में मनाई गई थी। ज्येष्ठ मास की दूसरी एकादशी शुक्ल पक्ष में 17 जून को पड़ेगी। इस बार निर्जला एकादशी पर चित्रा नक्षत्र व परिघ योग का संयोग रहेगा। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में पानी पीना भी वर्जित होता है। दरअसल, सभी एकादशी में से निर्जला एकादशी को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि इस दिन साधक बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं, क्योंकि इस व्रत का संबंध गदाधारी भीम के जीवन से भी है। पुजारियों ने बताया कि निर्जला एकादशी पर राहगीरों को पानी और शरबत पिलाना शुभ माना जाता है। मिट्टी का घड़ा और पंखा दान करना चाहिए। पारिवारिक जीवन में खुशी के लिए निर्जला एकादशी के दिन श्री हरि को चंदन का तिलक लगाएं। विष्णु जी को मक्खन, मिश्री का भोग लगाएं। श्री हरि मंत्र का जाप 108 बार करें। इस दिन विष्णु जी के साथ- साथ मां लक्ष्मी जी की भी आराधना करें। सोमवार 17 जून को परिघ योग रहेगा। वहीं दोपहर 12: 48 बजे तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद स्वाती नक्षत्र का प्रवेश होगा। व्रत रखने वाले 17 जून को निर्जला उपवास पर रहेंगे। दूसरे दिन मंगलवार 18 जून की सुबह पारण करेंगे। वहीं, 18 जून को वैष्णवों की एकादशी पड़ेगी।

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