Wednesday, February 11, 2026

पति की लंबी उम्र एवं सुखद गृहस्थ के लिए सुहागिन रखेंगी करवा चौथ का व्रत, बाजार में छाई रौनक, जमकर हो रही खरीदारी

Must Read

पति की लंबी उम्र एवं सुखद गृहस्थ के लिए सुहागिन रखेंगी करवा चौथ का व्रत, बाजार में छाई रौनक, जमकर हो रही खरीदारी

कोरबा। पति की लंबी उम्र एवं सुखद गृहस्थ जीवन के लिए सुहागिन महिलाएं कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को प्रत्येक वर्ष करवा-चौथ का व्रत रखती हैं। इस वर्ष 1 नवंबर बुधवार के दिन यह व्रत ग्रह-गोचरों व दिनमान के अद्भुत संयोग में मनायी जाएगी। करवा चौथ को लेकर बाजार में जमकर रौनक देखने को मिल रही है।चतुर्थी माता (करवा माता) और गणेश जी को समर्पित इस तिथि को अपने पति के प्रति समर्पित होकर सुहागन महिलाएं यह व्रत व उपवास उनके दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य तथा जन्म-जन्मांतर तक उन्हें पुन: पति रूप में प्राप्त करने हेतु मंगल कामना करती हैं। इस पर्व पर सुहागिन महिलाओं को करवा से चंद्रमा को अर्ध्य देने, चलनी से चंद्रमा के साथ जीवनसाथी को देखने की अनूठी परंपरा है।यह व्रत जीवन साथी के सौभाग्य और अच्छी सेहत की कामना के साथ किया जाता है। इस दिन चौथ माता की पूजा होती है। जो महिलाएं ये व्रत करती हैं, वे दिनभर पानी भी नहीं पीती हैं। ये निर्जला व्रत है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ कहते हैं।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस चतुर्थी की रात चौथ माता की पूजा की जाती है और चंद्र उदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है, पूजा की जाती है। इस पूजा के बाद ही महिलाएं खाना-पानी ग्रहण करती हैं। जो महिलाएं ये व्रत करती हैं, उनके लिए करवा चौथ माता की कथा पढऩा और सुनना जरूरी है।
बॉक्स
ये है करवा चौथ व्रत की कथा
पुराने समय में इंद्रप्रस्थ नगर था। वहां वेद शर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी थी लीलावती। इनके सात पुत्र और एक पुत्री थी। पुत्री का नाम वीरावती था। वीरावती की शादी हो गई और शादी के बाद कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर वह अपने भाइयों के घर आई थी। वीरावती ने अपनी भाभियों के साथ करवा चौथ व्रत रखा। वीरावती भूख-प्यास की वजह से चंद्र उदय पहले ही बेहोश हो गई। बहन को बेहोश देखकर सातों भाई परेशान हो गए।सभी भाइयों ने एक पेड़ के पीछे से मशाल जलाकर उजाला किया और बहन को होश में लाकर चंद्र उदय होने की बात कही। वीरावती ने भाइयों की बात मानकर विधिपूर्वक मशाल के उजाले को ही अर्घ्य दिया और भोजन कर लिया।इस व्रत के कुछ समय बाद ही उसके पति की मृत्यु हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद वीरावती ने अन्न-जल का त्याग कर दिया। उस दिन इंद्राणी पृथ्वी पर आई थीं।वीरावती ने इंद्राणी से अपने दुख का कारण पूछा। इंद्राणी ने वीरावती को बताया कि तुमने पिता के घर पर करवा चौथ का व्रत सही तरीके से नहीं किया था, उस रात चंद्र उदय होने से पहले ही तुमने अर्घ्य देकर भोजन कर लिया, इसीलिए तुम्हारे पति की मृत्यु हो गई है।अब उसे फिर से जीवित करने के लिए तुम्हें विधि-विधान के साथ करवा चौथ का व्रत करना होगा। मैं उस व्रत के पुण्य से तुम्हारे पति को जीवित कर दूंगी।वीरावती ने पूरे साल के बारह महीनों की सभी चौथ का व्रत किया और करवा चौथ का व्रत पूरे विधि-विधान से किया। इससे प्रसन्न होकर इंद्राणी ने उसके पति को जीवनदान दे दिया। इसके बाद उनका वैवाहिक जीवन सुखी हो गया। वीरावती के पति को लंबी आयु, अच्छी सेहत और सौभाग्य मिला।

Loading

Latest News

चढ़ाई में पीछे लुढ़क गई पिकअप, एक की मौत

कोरबा। बारातियों को लेने जा रही पिकअप चढ़ाई में पीछे लुढ़क गई। इस दौरान पीछे ट्राला से उतरकर भागने...

More Articles Like This