मिट्टी के दीये बनाने व बेचने में कुम्हार व्यस्त
कोरबा। धनतेरस के साथ दीपावली की शुरुवात हो चुकी है। सभी लोग पर्व की तैयारी में लगे हैं। वहीं कुम्हार परिवार परंपरा निभाने मिट्टी के दीये बनाने व बेचने में व्यस्त हैं। दिवाली में देशी बिजली झालरों की तुलना में कम टिकाऊ हैं, लेकिन आकर्षक मॉडल खरीदारी कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मिट्टी के बने दीपक व मोमबत्ती का उपयोग करने जागरूक कर रहे हैं। मिट्टी के दिये बनाने वाले कुम्हार ने बताया कि परिवार की परंपरा को निभाने इस व्यवसाय को अपनाए हैं। सौ रुपए सैकड़ा में मिट्टी का दीया बिकता है। जबकि उपली, भूसी व मिट्टी खरीदने में अधिक खर्च होता है। किसी तरह लागत निकल जाता है। व्यवसाय से जुड़ी महिलाएं कहती हैं कि सबसे बड़ी मुश्किल मिट्टी मिलने में होती है। अब लोग गिनती के दीपक व अन्य समान खरीदने हैं। कुम्हारी व्यवसाय से जुड़े लोगों कहना है कि सबसे ज्यादा नुकसान आधुनिक झालर से पहुंचा है। सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि चाइनीस झालर से कुम्हारों के व्यवसाय को चोट पहुंचाते हैं। व्यवसाय को बचाने के लिए झालरों के अलावा अन्य चाइनीज वस्तुओं पर बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर देना चाहिए। पहले गांव-गांव, घर-घर कुम्हार मिट्टी के दीपक लेकर पहुंचते थे, लेकिन अब याद कदा ही दिखाई देते हैं।
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