Thursday, February 12, 2026

दिवाली में देखा जाएगा प्रदूषण का स्तर, हर वर्ष की जाती है अनदेखी, स्तर की होगी स्पष्टता

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दिवाली में देखा जाएगा प्रदूषण का स्तर, हर वर्ष की जाती है अनदेखी, स्तर की होगी स्पष्टता

कोरबा। पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा शहर में तीन मशीनें लगा दी गई हैं। दिवाली के पहले धनतेरस को पहले दिन प्रदूषण का स्तर देखा गया। इसके बाद दीवाली के दिन होने वाले प्रदूषण को देखा जाएगा ताकि आम दिनों व दीवाली के दिन के हुए प्रदूषण का स्तर की जानकारी स्पष्ट मिल सके। दीवाली में हर वर्ष नियमों की अनदेखी की जाती है। विभाग द्वारा इस पर लगाम कसने किसी तरह की खास कवायद नहीं की जाती है। मानकों से ज्यादा आवाज वाले पटाखे फूटते हैं और प्रदूषण बढ़ता है। हालांकि मुख्य बाजार स्टेडियम में मानक के अनुरूप ही पटाखों की बिक्री होती है। अन्य स्थानों पर लोग चोरी-छिपे अधिक ध्वनि वाले पटाखे बेच जाते हैं। पिछले कई वर्षो से यही सिलसिला चला आ रहा है। शहर सहित उपनगरीय क्षेत्रों में लाखों रुपए का पटाखा व्यापार होता है। कोरबा पहले ही प्रदूषण के मामले में संवेदनशील है। पटाखों के कारण भी प्रदूषण अधिक होता है। पर्यावरण सरंक्षण मंडल प्रदूषण मापनेे केवल तीन यंत्र लगाया जा रहा है। पहला पर्यावरण संरक्षण कार्यालय दूसरा जमनीपाली व तीसरा टीपीनगर में। अब तीनों ही जगह पर आम दिनों व दिवाली के प्रदूषण का स्तर देखा जाएगा।आरएसपीएम (रेस्पीरबेल सस्पेंड पर्टीकुलर मेटर) के अनुसार वायु प्रदूषण 100 माइाक्रोग्राम प्रति एमक्यू होनी चाहिए। इसी तरह ध्वनि प्रदूषण सुबह छ: से रात दस बजे तक 55 डेसीबल व रात 10 से सुबह छ: बजे 45 डेसीबल होनी चाहिए।
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पक्षियों को भी रहता है खतरा
पटाखों से पक्षियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। अधिक विषैले धुएं से आसमान में उडऩे वाले पक्षियों को नुकसान पहुंच सकता है। खासकर प्रवासी पक्षियों को इसे खतरा हो सकता है। दिवाली के दौरान लगातार पांच दिन तक रात जमकर पटाखे फोड़े जाते हैं। धुंए व आवाज से इन पक्षियों को खासी परेशानी होती है।
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स्टेडियम में पटाखा बाजार सजे
स्टेडियम में पटाखा बाजार लग चुके हैं। पटाखा संघ के अध्यक्ष अश्वनी मिश्रा ने बताया कि इस बार 130 से अधिक पटाखा दुकानें लगाई गई हैं। सुरक्षा की पूरी तैयारी की गई है। इसी तरह बालको, हरदीबाजार, दीपका सहित अन्य क्षेत्र में भी पटाखा बाजार लगाया जा रहा है।

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