देवउठनी एकादशी को लेकर गन्नों की हो रही खूब बिक्री, शालीग्राम और तुलसी का होगा विवाह, गन्ने से सजाया जाएगा मंडप
कोरबा। गुरुवार को देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा इसके लिए गन्ने का बाजार सजकर कर तैयार है।देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। घर-घर गन्ने का मंडप बनाया जाएगा। रंग-बिरंगी झालर लाइटों से मंडप को सजाने की तैयारियां चल रही है। यह श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी की पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार देवउठनी एकादशी की पूजा गुरुवार को की जाएगी। एकादशी का प्रारंभ 22 नवंबर की रात लगभग साढ़े आठ बजे के बाद प्रारंभ होगी। समापन 23 नवंबर की रात को होगी। इस कारण इस बार देवउठनी एकादर्शी का पर्व गुरुवार को मनाई जाएगी। एकादशी भगवान विष्णु के लिए समर्पित होती है। इस दिन भगवान विष्णु के रूप शालीग्राम और माता तुलसी का विवाह करने की परंपरा है। एकादशी का व्रत रखकर श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना करेंगे। देवउठनी एकादशी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। देवउठनी एकादशी के अवसर पर तुलसी विवाह को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। श्रद्धालु इसकी तैयारी में जुटे हुए हैं। इस अवसर पर गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद, बेर, सेव, केला सहित अन्य मौसमी फलों की मांग बढ़ गई है। इसके अलावा घरों में कई स्वादिष्ठ पकवान और मिष्ठान भी बनाने की तैयारियां चल रही है। मान्यता है कि भगवान विष्णु लंबे समय बाद कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर जागते हैं। इसे लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है।देवउठनी एकादशी पूजा उत्सव को लेकर बाजार गुलजार हो गया है। शहरी क्षेत्र के बुधवारी, कोसाबाड़ी, इतवारी बाजार, मुड़ापार के साथ ही उप नगरीय क्षेत्र के गेवरा, दीपका, बांकीमोगरा, बालकोनगर सहित अन्य व ग्रामीण क्षेत्र के मुख्य मार्गो पर जगह-जगह गन्ने का बाजार सजकर तैयार हो गया है। लोगों में गन्ने की मांग बढ़ गई है। इसके अलावा मौसमी फल शकरकंद, सिंघाड़ा, आंवला, सेव, केला, बेर सहित अन्य फलों की भी मांग है।देवउठनी एकादशी (छोटी दीपावली) गुरुवार को मनाई जाएगी। घर-घर में भगवान शालिग्राम और माता तुलसी विवाह कर पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख और समृद्धि की जाएगी। इसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।
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