Tuesday, February 10, 2026

आखिर कैसे रुकेंगे सडक़ हादसे, ब्लैक स्पॉट्स पर तकनीकी सुधार करने के निर्णय पर अमल नहीं, सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक हुए गुजर चुके हैं कई माह

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आखिर कैसे रुकेंगे सडक़ हादसे, ब्लैक स्पॉट्स पर तकनीकी सुधार करने के निर्णय पर अमल नहीं, सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक हुए गुजर चुके हैं कई माह

कोरबा। कोरबा औद्योगिक नगरी है। यहां पावर प्लांट और कोयला खदानों की भरमार है। जिसके कारण सडक़ों पर यातायात का दबाव अधिक रहता है। यही वजह है कि प्रदेश के अन्य जिलों की अपेक्षा कोरबा में सडक़ हादसे अधिक होते हैं। बढ़ती सडक़ दुर्घटनाएं कोरबा जिले के लोगों के लिए काल बन बन गया है। आए दिन हादसे हो रहे हैं। इसमें लोग मारे जा रहे हैं। जिले के ऐसे स्पॉट जहां हादसे अधिक होते हैं। उन्हें ग्रे और ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हांकित किया गया है। इन स्पॉट्स पर तकनीकी सुधार के निर्णय लिए गए हैं, लेकिन इन पर अमल नहीं हुआ है। सडक़ दुर्घटनाओं के आधार पर जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों, राजकीय राजमार्गों पर चार ब्लैक स्पॉट और सात ग्रे स्पॉट चिन्हांकित किए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 पर बांगो थाना क्षेत्र में दो, कटघोरा थाना क्षेत्र में एक और क्रमांक 149-बी पर दर्री थाना क्षेत्र में राजकीय राजमार्ग एक ब्लैक स्पॉट चिन्हांकित किया गया है। कटघोरा थाना क्षेत्र में विष्णु ढाबा-भलपहरी में, बांगो थाना क्षेत्र में गुरसिया और पोड़ी बस स्टैंड के पास तथा दर्री थाना क्षेत्र में दर्री बांध कनवेयर बैल्ट के पास ब्लैक स्पॉट चिन्हांकित किए गए हैं। इसी प्रकार भैंसमा, चचिया तिराहा-पसरखेत रोड, बतारी मोड़ के पास, शुक्लाखार मेनरोड, वैशाली नगर कुसमुण्डा, सरई सिंगार कुसमुण्डा और हरदीबाजार कुसमुण्डा क्षेत्र में सात ग्रे स्पॉट पहचाने गए हैं। सभी ब्लैक और ग्रे स्पॉट्स पर तकनीकी सुधार करने का निर्णय लिया गया था। इन जगहों पर साइन बोर्ड लगाने, गति संकेतक बोर्ड लगाने, रबर स्ट्रीप लगाने के भी निर्देश लोक निर्माण विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को दिए। उन्होंने बिना रेलिंग वाले पुलों पर रेडियम पेंट युक्त रेलिंग और पुल के पहले गति अवरोधक बनाने कहा गया था। राष्ट्रीय राजमार्ग से ग्रामीण एवं जिला मार्गो के संगम स्थल पर भी रबर स्ट्रीप, संकेतक तथा रेडियम युक्त पेंट आदि कराने के निर्देश पीएमजीएसवाय तथा मुख्यमंत्री ग्राम सडक़ योजना के अधिकारियों को दिए गए थे। मगर संबंधित विभागों ने काम नहीं किया है। समिति की बैठक हुए कई माह गुजर गए हैं। नई बैठक की तिथि तय नहीं है। पूर्व में लिए गए निर्णय पर संबंधित विभागों ने कितना काम किया? इसे जानने वाला कोई नहीं है। जिम्मेदार मौन है। वाहन चालक अपनी मर्जी से गाडिय़ां चला रहे हैं। इसका असर यह हो रहा है कि दुर्घटनाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। अलग- अलग थाना क्षेत्र में आए दिन लोग मारे जा रहे हैं। इसी साल अभी तक 180 से अधिक लोगों ने अलग- अलग स्थान पर सडक़ दुर्घटना में अपनी जान गंवाई है। जबकि घायलों की संख्या सैकड़ों में है। सबसे अधिक सडक़ दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्ग पर बांगो, कटघोरा और पाली थाना क्षेत्र में हो रही हैं। खदान की सडक़ भी दुर्घटना के लिए खतरनाक बन कर उभरी हैं।
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आवारा मवेशी भी बन रहे हादसे का कारण
शहर और उप नगरीय इलाकों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं आवारा मवेशियों के कारण होती है। मवेशी सडक़ पर खड़े रहते है। कई बार राहगीर मवेशियों से टकरा जाते हैं। गंभीर चोट लगने से राहगीरों की मौत हो जाती है। आवारा मवेशियों को सडक़ से हटाने के लिए निगम का जिम्मा है। मगर निगम ने अपना काम पूरा नहीं किया है। बुधवारी बाजार, इतवारी बाजार, सीतामणी, मुड़ापार और दर्री सहित अन्य क्षेत्रों में आवारा मवेशी सडक़ पर आए दिन खड़े नजर आते हैं।

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