किसी भी समाज के सफल संचालन के लिए काूनन आवश्यक – विक्रम प्रताप चन्द्रा
केसीसी में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन
कोरबा। जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डीएल कटकवार के मागदर्शन एवं निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा विद्यालय, महाविद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में कोरबा कम्प्यूटर कॉलेज (केसीसी) में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
जिसमें विक्रम प्रताप चन्द्रा विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट के द्वारा छात्रों को बताया गया कि प्राय: कानून के नाम सुनते है उसका अर्थ अपराध से लगाते है। विधि के विपरीत कार्य करना अपराध होता है, चाहे व जाने – अनजाने में क्यों न हो। किसी भी समाज के सफल संचालन हेतु कानून का होना आवश्यक है। कायदे कानून से ही समाज चलता है। अधिकार के लिये सभी व्यक्ति जागरूक रहते है, किन्तु समाज में देखा गया है कि कर्तव्य की बात कोई नहीं करता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य का पालन करेंगे तो किसी भी व्यक्ति के अधिकार का हनन नहीं होगा। बालको के लैंगिंग अपराधों के संरक्षण से संबंधित जानकारी देते हुए कहा गया कि जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है वे बालको की श्रेणी में आते है। पीड़ित बालको के प्रकरण विशेष न्यायालय में सुना जाता है। मोटर दुर्घटना दावा अधिनियम की जानकारी देते हुए कहा गया कि बिना लायसेंस, वाहन के बीमा, वाहन का आर.सी. बुक के साथ ही वाहन का संचालन किया जाए। ये तीनों यदि किसी व्यक्ति के पास नहीं है तो होने वाले दुर्घटना में उनकों स्वयं ही अगले पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा देना पड़ता है। गंभीर चोट या मृत्यु होने पर और भी अधिक क्षतिपूर्ति देना वाहन मालिक का जवाबदेह हो जाता है। बच्चों को मोबाईल का सीमित उपयोग किये जाने का सलाह देते हुये कहा कि स्मार्ट मोबाईल का सद्पयोग किया जाए। बिना पढ़े कोई भी मैसेज फारवर्ड न करें, गलत मैसेज फारवर्ड करने पर साइबर कानून के तहत् अपराधिक मामला पंजीबद्ध किया जा सकता है।
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16 दिसम्बर को नेशनल लोक अदालत का आयोजन
नेशनल लोक अदालत के संबंध में जानकारी देते हुये श्री चन्द्रा के द्वारा कहा गया कि जिला एवं तहसील स्तर पर हाइब्रीड नेशनल लोक अदालत का आयोजन जा रहा है, जिसमें राजीनामा योग्य प्रकरणों का आपसी सहमति से नेशनल लोक अदालत में राजीनामा हो सकते है। छोटे शमनीय मामले, सिविल, चेक बाउन्स, मोटर दुघर्टना दावा प्रकरण, परिवार न्यायालय, श्रम न्यायालय एवं राजस्व न्यायालय एवं राजीनामा योग्य अन्य प्रकरण शामिल है।
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