Monday, February 16, 2026

जिस जमीन को पहले बताते थे बेगाना, कलेक्टर के निर्देश के बाद अब हो गया अपना, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कमाल, कलेक्टर के निर्देश के बाद विभाग का पकड़ा गया झूठ

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जिस जमीन को पहले बताते थे बेगाना, कलेक्टर के निर्देश के बाद अब हो गया अपना, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कमाल, कलेक्टर के निर्देश के बाद विभाग का पकड़ा गया झूठ

कोरबा। कलेक्टर ने सरकारी विभागों को अपनी जमीन पर बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। जिले के अंतर्गत नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्र की कोहड़िया-चारपारा के पास दर्री जाने वाले रोड किनारे जल संसाधन विभाग के खाली पड़े जमीन पर पिछली सरकार के कार्यकाल में हजारों हाईवा गाड़ी से राखड़ पाटा गया है। जबकि जल संसाधन विभाग रामपुर कोरबा में बैठे अधिकारी पहले कहते रहे कि यह किसी व्यक्ति की निजी जमीन है, तो फिर आज कलेक्टर साहब के निर्देश के बाद,अब यह जमीन छत्तीसगढ़ शासन के अचानक कैसे हो गया? कहीं जल संसाधन विभाग की अधिकारीयों और जमीन दलालों की मिली-भगत तो नहीं? और ऐसा है तो अधिकारीयों के विरुद्ध जांच होनी चाहिए! क्योंकि जिन अधिकारियों ने आज छत्तीसगढ़ शासन का विभागीय बोर्ड लगाए हैं। वही पहले कहते थे,कि यह जमीन निजी है। अब कलेक्टर के निर्देश के बाद उनके सुर बदल गए हैं। यह जांच का विषय है? अब यह जानना जरूरी है कि यह सब कैसे हुआ और बोर्ड जल संसाधन विभाग को क्यों लगाना पड़ा है। जिला कलेक्टर अजीत वसंत ने 19 जनवरी 2023 को कलेक्टर कार्यालय में विभागीय कार्यों सहित अन्य प्रयोजनों के लिए आबंटित शासकीय भूमि पर संबंधित विभागों को सूचना बोर्ड लगाने का निर्देश दिए। कलेक्टर अजीत वसंत ने इस संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया है,कि वे अपने विभागों के रिक्त भूमियों पर सूचना बोर्ड जरूर लगाएं। वही कलेक्टर के इस निर्देश पर अमल करते हुए विभागीय अधिकारियों द्वारा सूचना बोर्ड लगाना प्रारंभ भी कर दिया गया है। सूचना बोर्ड लगाए जाने से शासकीय भूमि पर एक ओर जहां अतिक्रमण पर रोक लगेगी। वहीं शासकीय भूमि का चिन्हांकन भी आसान होगा। कलेक्टर ने सभी एसडीएम को यह भी निर्देशित किया है कि विभागों द्वारा शासकीय भूमि पर लगाए जाने वाले सूचना बोर्ड के संबंध में वे निगरानी करना सुनिश्चित करने को कहा। लेकिन शासन के करोड़ों रुपये की यह जमीन को जल संसाधन विभाग रामपुर कोरबा में बैठे अधिकारियों ने जमीन दलालों के साथ मिली भगत कर कब्जा करवाने में सहयोग कर रहे थे। अगर अधिकारी कहते हैं कि इस मामले में हमारा कोई हाथ नहीं है तो फिर हजारों हाईवा गाड़ी से राखड़ क्यों पाटा गया है? यह सब कैसे हुआ। वही जब इस मामले में हमने जल संसाधन विभाग रामपुर कोरबा में बैठे एक बड़े अधिकारी से पिछले सरकार के कार्यकाल में राखड़ पाटने को लेकर सवाल पूछा था कि आपके विभागीय जमीन पर कब्जा कौन कर रहा है,तो उन्होंने कहा था कि यह जमीन हमारे विभाग की नहीं है। तो फिर सवाल उठता है कि कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश के बाद यह जमीन जल संसाधन विभाग कोरबा की अचानक कैसे हो गई? यह जमीन हकीकत में सरकारी संपत्ति है तो इसे कब्जा कौन कर रहा था? इसलिए मिली-भगत कर सरकारी जमीन पर कब्जा करवाने वाले अधिकारी के विरुद्ध जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर शासन व प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।

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