Sunday, February 15, 2026

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 फरवरी से करेगी आमरण अनशन

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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 फरवरी से करेगी आमरण अनशन

कोरबा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कुसमुडा, गेवरा, दीपका, बलगी की बैठक कुसमुंडा (एटक) कार्यालय में संपन्न हुई। जिसकी अध्यक्षता एलपी अघरिया द्वारा किया गया। भाकपा के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने कहा कि कोरोना काल के बाद से लगातार कोरबा एवं राज्य स्तरीय मुद्दों को पार्टी द्वारा प्रमुखता से उठाया जा रहा है, लेकिन शासन प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आज आम जनता के मुद्दे जैसे कोरबा को प्रदूषण मुक्त करना, कोरबा के सभी तालाबों की साफ सफाई एवं पानी भराव की व्यवस्था, भू विस्थापितों को नौकरी मुआवजा पुनर्वास, सभी वार्डों में पीने का पानी की व्यवस्था, सडक़, बिजली, नाली, साफ सफाई, बाल्को कंपनी में महिला -पुरुषों की उपेक्षा, रोड डामरीकरण एवं रोड निर्माण में गुणवत्ता की जांच, किसानों की जमीन का अधिग्रहण का मुआवजा, रेलवे क्रॉसिंग पर ओवर ब्रिज का निर्माण, नगर निगम सफाई कर्मी, कजरा उठाने वाले न्यूनतम मजदूरी एवं सामाजिक सुरक्षा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, छत्तीसगढ़ राज्य के उदयोगो में आउटसोर्स बंद करना एवं उसमें लगे कर्मचारियों को नियमित करना, ईएसआईसी हॉस्पिटल को सर्व सुविधायुक्त करना, निराश्रित एवं वृद्धा पेंशन 3000 करना एवं समय से देना सुनिश्चित करना, छत्तीसगढ़ राज्य में न्यूनतम मजदूरी 26000 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाने सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर यह चर्चा हुआ कि 16 फरवरी को पूरे देश में किसान मजदूर आम आदमी हड़ताल पर जा रहा है। उसी दिन कामरेड नवरंग लाल की पुण्यतिथि है। पार्टी के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा एवं उनके साथियों द्वारा 16 फरवरी से आमरण अनशन किया जाएगा। उनका कहना है कि आज भारत के लोगों को रामराज के सपने दिखाए जा रहे हैं। आजादी के 75 साल बाद भी भारत के अधिकांश किसानों को आज भी फसलों का वाजिब दाम नहीं मिलता है।भारत के 85 फीसदी मजदूरों को न्यूनतम वेतन नहीं मिलता है। उनसे यूनियन बनाने का अधिकार लगभग छीन लिया गया है। अस्थाई नौकरियों को खत्म करके उनका ठेका कारण किया जा रहा है। उनसे पेंशन छीन ली गई है। जिस कारण वे शोषण और अभाव के सबसे बड़े शिकार बन गए हैं। आंदोलन करने पर भी सरकार कोई सुनवाई या कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। भारत में इस वक्त लगभग 10 करोड़ मुकदमें न्यायालयों में लंबित हैं, मुक़दमों के अनुपात में ना तो जज हैं, ना स्टेनो हैं, ना कर्मचारी हैं और ना ही अदालतें हैं। बच्चों की शिक्षा का स्तर लगातार तेज गति से गिरता जा रहा है। गरीबों के बच्चे ठीक से लिख और पढ़ पाते भी नहीं है। बैठक में सहायक जिला सचिव कामरेड रेवत प्रसाद मिश्रा, सिदाय दास, के पी डडसेना, मुकेश कुमार साहू, एस एन राव, हरनारायण केशरवानी, कृपाल राम, दुधनाथ व अन्य उपस्थित रहे।

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