सत्कर्म करने में विलम्ब नहीं करना चाहिए- प्रेमभूषण
कोरबा। इंदिरा स्टेडियम आदर्श नगर कुसमुंडा में चल रहे श्रीराम कथा में कथावाचक प्रेमभूषण महराज ने कहा कि अपने जीवन में मनुष्य अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी तो तय कर देता है, लेकिन उसने जो परमार्थ कार्य किया है, उसे भी आगे बढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं सोचता है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम को अपने भरत से भी ज्यादा प्रेम करने वाली कैकई माता को कुटिल बुद्धि वाली दासी मन्थरा का केवल स्पर्श दोष लगा था। माता की बुद्धि पलट गई और उन्होंने रामजी को 14 वर्ष के लिए वन में भेजने का वचन महाराजा दशरथ से ले लिया। उन्होंने कहा कि भगवत कार्य में लगने का प्रतिफल जरूर प्राप्त होता है संसार में व्यक्ति जिस प्रकार का कर्म करता है उसी प्रकार के युग में उसका जीवन भी व्यतीत होता है। सत्कर्म में निरंतर गति रखने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी कलयुग आता ही नहीं है वह तो हमेशा सतयुग में ही जीवन व्यतीत करता है। कोई भी सत्कर्म करने में विलम्ब नहीं करना चाहिए और झंझट को कल पर टाल देना चाहिए। यह भी कहा कि रामजी भगवान विकार रहित एवं सुख-दु:ख से परे है। ये बेकार की चर्चा है कि भगवान दर-दर भटके। हम संसारी लोग अपने हिसाब से कल्पना कर लेते है। महर्षि बाल्मीकि की यह शिक्षा मनुष्य को हमेशा याद रखने की आवश्यकता है कि भगवत प्रसाद का रस अपने आप प्राप्त नहीं होता है। इसके लिए प्रयास करना ही पड़ता है। एसईसीएल के महा प्रबंधक संजय मिश्रा, दैनिक यजमान सौमित्र चन्द्रा, के एस सरुता और अजीत सिंह ने सपत्नीक व्यास पीठ का पूजन किया और भगवान की आरती उतारी।
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