एसईसीएल में विभागीय मेनपावर में आ रही कमी, साल दर साल उत्पादन टारगेट में किया जा रहा है इजाफा
कोरबा। एक तरफ एसईसीएल में कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है तो दूसरी तरफ सालाना कोल खनन का टारगेट हर साल बढ़ रहा है। ठेका मजदूरों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। हालांकि पहले की तुलना में हाइटेक मशीनरियों की संख्या में इजाफा हुआ है इसकी वजह से मैनपॉवर की जरुरत पहले की तुलना में कम पड़ रही है।एसईसीएल में बीते एक साल में कर्मचारियों की संख्या में लगभग दो से तीन हजार की कमी आई है। 2020-21 की तुलना में 2021-22 में कर्मचारियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। इसमें अत्यधिक कुशल कैटेगिरी में ही सबसे अधिक कर्मचारी घटे हैं। वर्तमान में एसईसीएल के अलग-अलग परियोजनाओं में लगभग 40 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। लगातार सेवानिवृत होने की वजह से कोयला कामगारों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। नियमित तौर पर भर्ती नहीं होने से कार्यरत कर्मियों पर वर्कलोड बढ़ रहा है। एक तरफ निचले स्टॉफ लगातार घट रहे हैं तो वहीं अफसरों की संख्या में आंशिक इजाफा भी हुआ है। एक तरफ जहां हजारों में कर्मचारियों की संख्या में कमी आई तो वहीं भर्ती सिर्फ दहाई के पदों पर ही हुई है। हालांकि जमीन लेने के ऐवज में भूविस्थापितों को एसईसीएल ने नौकरी दी है। तो वहीं ऐसे एसईसीएल कर्मी जो मेडिकल अनफिट हैं या फिर जिनकी रिटायरमेंट से पहले मृत्यु हो चुकी है ऐसे पदों पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। वहीं माइनिंग सरदार के डिप्टी सर्वेयर, जूनियर ईसीजी टेक्निीशियन के एक पद पर नई भर्ती हुई है ।एसईसीएल में महिला कामगारों की संख्या भी कम है। वर्तमान में एसईसीएल में अलग-अलग वर्ग में लगभग 3हजार महिला कामगार हैं। इनमें एक्जीक्यूटिव, मासिक वेतन, दैनिक वेतन भोगी कंपनी ट्रैनी के पद पर महिला कर्मचारी कार्यरत हैं।
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