Thursday, February 12, 2026

कामबंद-कलमबंद हड़ताल की राह पर पंचायत सचिव, पीएम आवास निर्माण की गति धीमी होने पर रूका है वेतन, सचिवों को अपनी तनख्वाह के लिए करनी पड़ती है भागदौड़

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कामबंद-कलमबंद हड़ताल की राह पर पंचायत सचिव, पीएम आवास निर्माण की गति धीमी होने पर रूका है वेतन, सचिवों को अपनी तनख्वाह के लिए करनी पड़ती है भागदौड़

कोरबा। प्रधानमंत्री आवास निर्माण में मंशा अनुरूप प्रगति नहीं आने पर पंचायत सचिवों के सिर ठिकरा फोड़ दिया गया। 66 पंचायत सचिव ऐसे हैं जिनके वेतन पर रोक लगा दी गई। पहले से ही वेतन विसंगति के कारण परेशान सचिवों में आक्रोश व्याप्त हो गया है। उन्होंने सप्ताह भर के भीतर वेतन भुगतान सहित अन्य विषंगतियों में सुधार नहीं किए जाने पर कामबंद, कलमबद्ध हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री आवास निर्माण की स्वीकृति मिलनी शुरू हो गई है। शासन की ओर से जिले के पांचों जनपद पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए भारी संख्या में आवासों को मंजूरी दी गई है। पहले से ही स्वीकृत आवासों के निर्माण में प्रगति नहीं आने के कारण नए आबंटन की रफ्तार भी धीमी है। इसके लिए पंचायत सचिवों को जवाबदार ठहराया जा रहा है। चुनावी सीजन में भी लगातार पंचायत सचिवों को काम में तेजी लाने के निर्देश जारी किए गए थे। जिला पंचायत की ओर से 124 पंचायत सचिवों के वेतन पर रोक लगाई गई थी, हालांकि दूसरे ही माह वेतन का भुगतान कर दिया गया। लोकसभा चुनाव के संपन्न होते ही एक बार फिर 66 पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है। इसके पीछे प्रधानमंत्री आवास में मंशा अनुरूप प्रगति नहीं आने को कारण माना गया है। वहीं पंचायत सचिवों के वेतन भुगतान के लिए तिथि निर्धारित नहीं की गई है। उन्हें अपने ही वेतन के लिए दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ता है। यदि एरियर्स की बात करें तो राशि तो आबंटित हो गई है, लेकिन तीन माह बाद भी भुगतान नहीं किया जा सका है। इसी तरह लंबित वेतन का प्रकरण भी अधर में लटका है। इन तमाम समस्याओं से जूझ रहे पंचायत सचिवों में अब हक की लड़ाई लडऩे की मंशा बना ली है। प्रदेश पंचायत सचिव संघ जिला कोरबा के जिला अध्यक्ष जयपाल सिंह कंवर के नेतृत्व में सचिवों ने ज्ञापन सौंपते हुए एक सप्ताह के भीतर समस्याओं के निराकरण करने की मांग की है। यदि निर्धारित अवधि में पहल नहीं की जाती है तो पंचायत सचिवों ने काम बंद, कलम बंद हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है।
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जमीनी स्तर पर आ रही दिक्कतें
शासन ने प्रधानमंत्री आवास के लिए स्वीकृत राशि को सीधे हितग्राहियों के खाते में डालने की नीति तैयार की है। इसी नीति के तहत निर्माण कार्य की प्रगति के आधार पर चार किस्तों में राशि का भुगतान किया जाता है। पूर्व में मॉनिटरिंग की जवाबदारी आवास मित्रों को दी गई थी। पंचायत सचिवों का इससे कोई सरोकार नहीं था। अब जमीनी स्तर पर पंचायत सचिवों के लिए निर्माण कार्य में प्रगति लाने में दिक्कतें आ रही है।
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ग्रामीणों को हो सकती है परेशानी
आवास निर्माण में मंशा अनुरूप प्रगति नहीं आने पर पंचायत सचिवों का वेतन रोका गया गया है। इसी तरह सचिव वेतन से संबंधित कई विषंगतियों से जूझ रहे हैं। यदि उनकी समस्या का निराकरण नहीं होता है तो हड़ताल पर जा सकते हैं। चुनावी वर्ष होने के कारण पहले से ही विकास कार्य सहित अन्य काम की गति धीमी है। उस पर सचिवों के हड़ताल का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है।

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