Tuesday, February 17, 2026

17 जुलाई को देवशयनी एकादशी, चातुर्मास की शुरुआत, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ जैसे शुभ कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक

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17 जुलाई को देवशयनी एकादशी, चातुर्मास की शुरुआत, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ जैसे शुभ कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक

 

कोरबा।आषाढ़ मास धर्म-कर्म के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इस महीने से चातुर्मास शुरू होते हैं। देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु का विश्राम शुरू हो जाता है और 4 महीने तक भगवान योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ जैसे शुभ कार्य नहीं होते हैं। हालांकि, बहुत जरूरी होने पर शुभ दिन और तिथि देखकर काम किया जा सकता है।देवशयनी एकादशी से 2 दिन पहले आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तक आखिरी मुहूर्त रहता है। 16 जुलाई को नवमी तिथि रहेगी और 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। देवशयनी एकादशी की तिथि 16 जुलाई को शाम 5:05 बजे से शुरू होकर 17 जुलाई को शाम 5:42 बजे समाप्त होगी। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी और 12 नवंबर को समाप्त होगा। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु 4 महीने के लिए सो जाते हैं। भगवान 4 महीने बाद देवउठनी एकादशी को उठते हैं। 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन चातुर्मास की शुरुआत होगी। चतुर्मास का समापन 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर होगा। इस दिन भगवान शयन से उठेंगे। इस बार चातुर्मास 118 दिन का रहेगा, जबकि पिछले साल चातुर्मास 148 दिन का रहा था। पिछले साल चतुर्मास के दौरान मलमास पड़ने से 30 दिन अधिक रहा था।चातुर्मास तो 12 नवंबर को खत्म हो जाएगा, लेकिन विवाह के मुहूर्त के लिए इसके बाद भी 4 दिन इंतजार करना होगा। पंडित के अनुसार 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के बाद विवाह का मुहूर्त बन रहा है। 16 नंवबर से विवाह के मुहूर्त आरंभ होंगे। 16 नवंबर से 28 नवंबर के बीच 8 दिन विवाह के अच्छे मुहूर्त हैं। वहीं दिसंबर में 7 दिन विवाह का लग्न 15 तारीख तक है।

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