माता गांधारी के श्राप की शांति के लिए किया हवन

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माता गांधारी के श्राप की शांति के लिए किया हवन

कोरबा। महाभारत काल में माता गांधारी के श्राप से श्रापित यदुवंशियों ने श्राप की शांति के लिए हवन किया। इस अनूठे आयोजन की शुरुआत छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा जिले से हुई है।
यादव समाज यादव एकता मंच के द्वारा बुधवार को कनकेश्वर महादेव की नगरी ग्राम कनकी में माता गांधारी श्राप शांति हवन का आयोजन किया गया। लगभग 11 घंटे तक हवन का आयोजन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में यादव समाज के लोगों ने सपत्नीक शामिल होकर यज्ञ-हवन का विधान संपन्न किया। कनकेश्वर धाम के प्रमुख पुजारी पुरूषोत्तम यादव के आचार्यत्व में, यदुवंशी अतिथि पुरोहितगण वृंदावन, बैद्यनाथधाम, चित्रकूट के सहयोग से हवन विधि-विधान पूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन में प्रमुख भूमिका मनहरण यादव, संयोजक राजा यादव सहित यादव समाज के विभिन्न लोगों ने निभाई।
आयोजकों ने बताया कि महाभारत काल में कौरवों की माता महारानी गांधारी के द्वारा कुरुक्षेत्र रणशिविर में श्री कृष्ण को श्राप दिया गया कि जिस तरह से मेरे वंश का नाश हुआ है, उसी तरह तुम्हारी यदुवंश का भी नाश होगा। जिस तरह से कौरव और पांडव भाई-भाई आपस में लड़ मरे हैं, उसी तरह तुम्हारे यादव भी आपस में लड़ेंगे और एक-दूसरे का विरोध करेंगे। जिस तरह से मेरे पुत्रों की मृत्यु हुई है उसी तरह तुम्हारी भी मृत्यु हो जाएगी और न तुम रहोगे न तुम्हारी द्वारिका, सबका विनाश हो जायेगा। इस श्राप के 36 साल बाद द्वारिका नगरी सागर में समा गई। एक सामान्य शिकारी के बाण से श्रीकृष्ण की मृत्यु हो गई और फिर यादव समाज भी आपस में लडऩे लगे। इसके आधार पर माना गया कि 36 के आंकड़े को शांत करने के लिए छत्तीसगढ़ से महायज्ञ का शुभारंभ कर पश्चिम बंगाल में समापन एवं विसर्जन किया जाना समाज हित में होगा। इस क्रम में माता गांधारी श्राप शांति हवन महायज्ञ का 1008 कुण्डीय यज्ञ आयोजन देश के विभिन्न स्थानों पर करने का निर्णय लिया गया है और कोरबा में ग्राम कनकी में हवन संपन्न हुआ।

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