आइओसीएल का ठेकेदार कर रहा मजदूरों का शोषण, श्रम मंत्री लखन ने सहायक श्रम आयुक्त को परीक्षण उपरान्त त्वरित कार्रवाई के दिए निर्देश
कोरबा। इंडियन आयल कॉरपोरेशन लिमिटेड प्लांट कुसमुंडा के ठेकेदार संदीप सिंह द्वारा मजदूरों के ड्यूटी व मासिक वेतन में भारी भष्टाचार व शोषण की शिकायत श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन से की गई है। जिस पर श्री देवांगन ने सहायक श्रम आयुक्त को परीक्षण उपरान्त त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शिकायत पत्र में कहा गया है कि वे विगत 7 से 15 साल से आइओसीएल प्लांट में ठेका मजदूर के रूप में कार्यरत हैं आइओसीएल प्लांट द्वारा बारूद का निर्माण कर खदानों में ब्लास्टिंग के लिए वितरण किया जाता है। सभी मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर खदान अंदर बिना सुरक्षा उपकरण के बारूद डालने डालने, होल भरने, लाइन बनाने का कार्य करते हैं। ठेकेदार द्वारा एचपीसी रेट में भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उनका काम अत्यंत ही संवेदनशील तथा जोखिम भरा है। मजदूर पिछले 1 साल से लगातार श्रम आयुक्त एवं जिला प्रशासन एवं खान प्रबंधक को आवेदन निवेदन करते आ रहे हैं, किंतु उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। 15-18 दिन के ड्यूटी से बच्चों की शिक्षा, ईलाज, व परिवार भरण पोषण करने में अत्यन्त ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदार संदीप सिंह द्वारा मजदूरों को आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। अगर 10 दिवस के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी आइओसीएल प्रबंधन की होगी। शिकायत पर अब श्रम मंत्री ने संज्ञान लिया है। सहायक श्रम आयुक्त को निर्देशित किया है।
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यह है प्रमुख समस्याएं
0 मजदूरों को माह में केवल 15 से 18 दिन ही ड्यूटी दिया जाता है।
0 मजदूरों को पेमेंट स्लिप नहीं दिया जाता है।
0 8 घंटे से अधिक कार्य लेने पर ठेकेदार द्वारा अतिरिक्त कार्य ओटी का पैसा नहीं दिया जाता है।
0 आईओसीएल की अन्य शाखा जैसे सिंगरौली प्लांट की तरह ठेका मजदूरों को टिफिन व अन्य एलाऊनस की सुविधा नहीं दिया जाता है।
0 प्रोविजनल बोनस 8.33 प्रतिशत नहीं दिया जाता है।
0 परिचय पत्र तथा सुरक्षा उपकरण नहीं दिया जाता है, जिससे अपनी जान जोखिम में डालकर खदान अंदर बिना सुरक्षा के कार्य करने को विवश है ।
0 ज्वाइनिंग आईबीपी आइओसीएल प्लांट में हुआ है। ठेकेदार द्वारा खदान अंदर भेजा जाता है व एचपीसी रेट की दर से भुगतान नहीं किया जाता है।
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