ईएसआई और ईपीएफ की सीमा सहित न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग
कोरबा। भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया से मिलकर ईएसआई और ईपीएफ पात्रता की उच्चतम सीमा दोगुनी बढ़ाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि मौजूदा सीमाएँ बहुत कम हैं जो कि आय और कीमतों में वृद्धि के अनुरूप लम्बे समय से नहीं बढ़े हैं। व्याप्ति की उच्चतम वेतन सीमा में बढ़ोतरी से श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग, जो अभी इन योजनाओं के लाभ से वंचित है. इनके दायरे में आ जायेगा और इनका लाभ उठा सकेगा। दोनों योजनाओं की व्याप्ति बढ़ जाएगी। बीएमएस के प्रतिनिधिमंडल ने वेतन संहिता 2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 को शीघ्र लागू करने की भी मांग की। ये दोनों संहिताएं आम श्रमिकों के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक साबित होंगी। पहली बार वेतन संहिता देशभर के सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करेगी। सामाजिक सुरक्षा संहिता 43 करोड़ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों सहित सम्पूर्ण कार्य जगत को कई सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने वाली है। ये दोनों कोड श्रम कल्याण लाभों के सार्वभौमिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अन्य दो संहिताएं औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति कोड 2020 में कुछ श्रमिक विरोधी प्रावधान हैं जिन्हें बदलने की आवश्यकता है। ओ एस एच कोड में श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी बेहतरीन प्रावधान हैं, किन्तु कोड में निर्धारित न्यूनतम सीमा इसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभों को सीमित करती है। बीएमएस ने श्रम संहिताओं पर सभी ट्रेड यूनियनों के साथ विस्तृत परामर्श करने और खामियों को दूर करते हुए जल्द से जल्द संहिताओं को लागू करने की भी मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने श्रम से संबंधित कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष हिरण्मय पंड्या, महामंत्री रवींद्र हिम्मते, पूर्व अध्यक्ष सजी नारायणन, पूर्व महामंत्री विरजेश उपाध्याय, संगठन मंत्री बी सुरेंद्रन, सह संगठन मंत्री गणेश मिश्रा, कॉन्ट्रैक्ट लेबर बोर्ड के अध्यक्ष सुरेंद्र पांडे और ईएसआईसी के सदस्य एस दुरईराज शामिल थे।
![]()

