नियम कायदों को ताक पर रखकर हो रहा राखड़ परिवहन, पुलिस और प्रशासन बनी है मूक दर्शक, गिरते राखड़ से चलना हो रहा मुश्किल

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नियम कायदों को ताक पर रखकर हो रहा राखड़ परिवहन, पुलिस और प्रशासन बनी है मूक दर्शक, गिरते राखड़ से चलना हो रहा मुश्किल

कोरबा। जिले में राखड़ परिवहन को लेकर तमाम नियम कानून बनाए गए हैं। जिसका पालन सडक़ों पर होता नजर रहीं आ रहा है। पूरी तरह से राखड़ को ढक कर परिवहन करने की बजाए सडक़ पर उड़ाते और गिराते हुए ले जाया जा रहा है, जिससे सडक़ पर चलना मुश्किल हो गया है। राखड़ के कारण मार्ग में दृश्यता का अभाव हो जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। दूसरी ओर कार्रवाई के बजाय पुलिस और प्रशासन मूक दर्शक बनी है। जिससे परिवहन कर्ता ठेका कंपनी के हौसले बुलंद हैं और वह मनमानी पर उतारू है। इसी तरह की स्थिति रविवार को रिस्दी के आगे उरगा जाने वाली मार्ग पर देखने को मिली। जहां जगह-जगह राखड़ लोड वाहनों को सडक़ किनारे खड़ा कर दिया गया है जो वाहन गुजर रही है उसमें से राखड़ उडक़र वातावरण में फैल रहा था, तो व्यापक पैमाने पर राखड़ सडक़ पर ही गिरता जा रहा है। जिसे मार्ग पर चलने वाले वाहन चालकों को आगे कुछ नजर नहीं आ रहा था। राखड़ परिवहन में लगे वाहनों के सडक़ किनारे खड़े होने से आवागमन में मुश्किल होने के साथ जाम की स्थिति भी निर्मित हो रही है। पर्यावरण विभाग के अधिकारी निगरानी के दावे तो कर रहे है, लेकिन रिस्दी-उरगा बायपास मार्ग पर विभाग के दावों के विभाग की पोल हर पल खुल रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने राखड़ को बड़ा मुद्दा बनाया था। केन्द्र के साथ राज्य में डबल इंजन की सरकार बन चुकी है, लेकिन कोरबा की जनता को राखड़ की समस्या छुटकारा अब तक नहीं मिला है।

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